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  • हमास से लड़ाई पर फंसा पाकिस्तान, गाजा में सेना भेजने को तैयार हैं असीम मुनीर, ट्रंप से मिलेंगे शहबाज शरीफ

    वॉशिंगटन: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस हफ्ते अमेरिका जा रहे हैं। उनके दौरे का मकसद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में होने वाली ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बैठक में शामिल होना है। बोर्ड ऑफ पीस में 20 देश शामिल हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने तीन पाकिस्तानी सूत्रों के हवाले से बताया है कि


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    By Azad Hind Desk फरवरी 19, 2026
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    वॉशिंगटन: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस हफ्ते अमेरिका जा रहे हैं। उनके दौरे का मकसद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में होने वाली ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बैठक में शामिल होना है। बोर्ड ऑफ पीस में 20 देश शामिल हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने तीन पाकिस्तानी सूत्रों के हवाले से बताया है कि पाकिस्तान अमेरिका से ये भरोसा चाहता है कि इंटरनेशनल स्टेबिलाइज़ेशन फोर्स में गाजा में वो जो सैनिकों को भेजेगा, वो पीसकीपिंग मिशन पर होंगे ना कि वो हमास से लड़ाई करेंगे। ट्रंप की अध्यक्षता में ये बैठक गुरुवार को होने वाली है, जिसमें कम से कम 20 देशों के डेलीगेशन शामिल हो रहे हैं।

    दरअसल, गाजा में सैनिकों को भेजने को लेकर पाकिस्तान सरकार अपने देश में बुरी तरह से फंसी हुई है। वहीं जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का ये भी मानना है कि ऐसी खबरों को फैलाना कि पाकिस्तान, ट्रंप से गारंटी चाहता है कि उसके सैनिक हमास से नहीं लड़ेंगे, उसका झूठ हो सकता है। पाकिस्तानी सरकार, ऐसी खबरों को फैलाकर देश की जनता को चकमा देने की कोशिश कर रही है, क्योंकि ट्रंप को मना करने की हैसियत शहबाज शरीफ और असीम मुनीर में नहीं है।

    अमेरिका में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक में क्या होने की उम्मीद
    डोनाल्ड ट्रंप गाजा के लिए कई अरब डॉलर के फंड का ऐलान कर सकते हैं।
    ट्रंप प्रशासन करीब 5 अरब डॉलर के शुरूआती पैकेज का कर सकता है ऐलान
    फिलीस्तीन एन्क्लेव के लिए स्टेबिलाइजेशन फोर्स के लिए डिटेल प्लान की घोषणा करेंगे।
    बैठक का एक बड़ा एजेंडा हमास से हथियार छीनने के लिए सेना के गठन का होगा

    ‘इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स’ (ISF) की तैनाती
    हजारों अंतरराष्ट्रीय सैनिकों और पुलिसकर्मियों की एक फोर्स बनाने पर चर्चा होने की उम्मीद
    इंडोनेशिया ने पहले ही करीब 8,000 सैनिक गाजा में भेजने पर प्रतिबद्धता जताई है।
    पाकिस्तान भी डोनाल्ड ट्रंप से सैनिकों को भेजने पर प्रतिबद्धता जता सकता है।
    पाकिस्तान ने शुरूआत में कुछ हजार सैनिकों को गाजा में भेजने पर सहमति जताई है।
    गाजा में शासन चलाने के लिए ‘टेक्नोक्रेटिक कमेटी’ का गठन किया जा सकता है।

    रॉयटर्स ने पाकिस्तान के तीन सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा है कि वॉशिंगटन दौरे के दौरान शहबाज शरीफ, सैनिकों को तैनात करने का फैसला करने से पहले ISF के लक्ष्य, वे किस अथॉरिटी के तहत काम कर रहे थे और चेन ऑफ कमांड क्या होगा इसे बेहतर ढंग से समझना चाह रहे हैं। शहबाज शरीफ के एक करीबी सहयोगी ने रॉयटर्स से कहा है कि “हम सैनिक भेजने के लिए तैयार हैं। मैं यह साफ कर दूं कि हमारे सैनिक गाजा में सिर्फ़ शांति मिशन का हिस्सा हो सकते हैं।” उन्होंने कहा, “हम हमास के हथियार निरस्त्रीकरइ जैसे किसी दूसरे रोल का हिस्सा नहीं होंगे। यह सवाल ही नहीं उठता।” माना जा रहा है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने ये खबर प्लांट करवाया है, ताकि घरेलू विरोध से बचा जा सके। कुछ अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां इन दिनों लगातार पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने में जुटी हुई हैं।

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