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  • India AI Impact Summit 2026: ‘दुनिया में AI को सबसे ज्यादा इस्तेमाल करेंगे भारतीय’, किस CEO ने कहा ऐसा?

    नई दिल्लीः आने वाले कुछ वर्षों में AI का असर भारत में दुनिया के किसी भी दूसरे देश से ज्यादा दिखाई देगा। एडोबी के चेयरमैन और CEO शांतनु नारायण ने AI समिट में कहा कि भारत की बड़ी आबादी और तेजी से बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल की वजह से यहां AI का प्रभाव व्यापक और गहरा


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    By Azad Hind Desk फरवरी 20, 2026
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    नई दिल्लीः आने वाले कुछ वर्षों में AI का असर भारत में दुनिया के किसी भी दूसरे देश से ज्यादा दिखाई देगा। एडोबी के चेयरमैन और CEO शांतनु नारायण ने AI समिट में कहा कि भारत की बड़ी आबादी और तेजी से बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल की वजह से यहां AI का प्रभाव व्यापक और गहरा होगा। उन्होंने कहा कि अगले कुछ साल में भारत में AI का इस्तेमाल करने वालों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक हो सकती है। यही वजह है कि AI के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी यहां ज्यादा बड़े पैमाने पर देखने को मिलेंगे।

    सिर्फ एआई मॉडल बनाने तक सीमित नहीं रहेगा भारत

    नारायण ने कहा, ‘भारत सिर्फ AI मॉडल बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डेटा, प्राइवेसी, सुरक्षा और भरोसे के मुद्दों पर भी वैश्विक नेतृत्व कर सकता है। AI के दौर में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ तकनीक का नहीं, बल्कि यह है कि डेटा का उपयोग कैसे हो, लोगों की निजता कैसे सुरक्षित रहे और सिस्टम पर भरोसा कैसे कायम किया जाए।’ कंटेंट ऑथेंटिसिटी यानी डिजिटल कंटेंट की प्रमाणिकता को उन्होंने भारत के लिए बड़ा अवसर बताया। नारायण ने कहा, ‘फेक कंटेंट और डीपफेक के बढ़ते खतरे के बीच असली और नकली में फर्क करना अहम होता जा रहा है। इस क्षेत्र में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।’

    AI को लोकतांत्रिक बनाने पर क्या कहा…

    AI को लोकतांत्रिक बनाने और उसे कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहने देने के सवाल पर नारायण ने कहा कि कमर्शल हितों और मानवता के व्यापक हितों के बीच टकराव की चुनौतियां रहेंगी। कंपनियां अपने डेटा और तकनीक को सुरक्षित रखना चाहेंगी, लेकिन समाज के लिए तकनीक का लाभ भी जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस संतुलन को साधने में भारत बेहतर स्थिति में है। नारायण ने कहा, ‘मुझे भारत को लेकर ज्यादा भरोसा है कि यहां AI का विकास सही दिशा में होगा और यह देश वैश्विक स्तर पर उदाहरण पेश कर सकता है।’

    एक्सेंचर की CEO ने कही बड़ी बात

    एक्सेंचर की CEO जूली स्वीट ने AI इंपैक्ट समिट में कहा कि भारत एजुकेशन सेक्टर में AI को शामिल करने का शानदार काम कर रहा है। स्कूल से ही AI को पढ़ाई का हिस्सा बनाया जा रहा है। दुनिया भर की सरकारों को भी यही करना होगा। उन्होंने कहा, ‘अब शिक्षा सिर्फ एक डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रह सकती। सीखना आजीवन प्रक्रिया बन चुका है। देशों और व्यक्तियों दोनों को अपनी सोच बदलनी होगी, क्योंकि औपचारिक शिक्षा अब अंतिम मंजिल नहीं है।’

    AI के दौर में भी एंट्री-लेवल नौकरियां जरूरी

    जूली स्वीट ने कहा कि जो देश और कंपनियां नई तकनीक को अपनाती हैं और उससे विकास और उत्पादकता बढ़ाती हैं, वही आगे बढ़ती हैं। पिछले दशक में ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीकों के बढ़ने के बावजूद आईटी सेवाओं में नौकरियां बढ़ीं। उन्होंने कहा, ‘AI के दौर में भी एंट्री-लेवल नौकरियां जरूरी हैं। यही भविष्य के लीडर्स तैयार करती हैं और संगठनों को नया टैलंट देती हैं। एक्सेंचर इस साल पिछले साल से ज्यादा एंट्री-लेवल कर्मचारियों की भर्ती करेगा।’

    सेफ AI के लिए वैश्विक मानक जरूरी…

    जूली स्वीट ने कहा कि छोटे और मध्यम उद्योगों को तकनीक और प्रतिभा तक पहुंच मिलना बेहद जरूरी है। ये कंपनियां वैश्विक जीडीपी का लगभग आधा हिस्सा बनाती हैं और खासकर ग्लोबल साउथ में रोजगार का बड़ा स्रोत हैं। अगर AI को विकास का इंजन बनाना है, तो इन उद्यमों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘इसके लिए निजी और सरकारी साझेदारी अहम होगी। साथ ही, एआई के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग के लिए वैश्विक मानक तय करना भी जरूरी है, ताकि तकनीक का अधिकतम लाभ समाज को मिल सके।’

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