एल्विश यादव इन दिनों ‘लाफ्टर शेफ्स 2’ और ‘इंगेज्ड 2’ में भी नजर आ रहे हैं। साल 2023 के ‘सांप का जहर’ ममाले में सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा, ‘अगर मशहूर लोगों को सांपों जैसे ‘बेजुबान शिकार’ का इस्तेमाल करने दिया जाता है, तो इससे समाज में बहुत बुरा मैसेज जा सकता है।’
SC ने कहा- क्या आप चिड़ियाघर जाकर वहां जानवरों के साथ खेल सकते हैं?
अदालत ने एल्विश यादव से सीधा सवाल करते हुए कहा, ‘आप सांप को लेकर खेलते हैं। आपने सांप से डील किया या नहीं? क्या आप चिड़ियाघर जाकर वहां जानवरों के साथ खेल सकते हैं? क्या यह जुर्म नहीं होगा? आप यह नहीं कह सकते कि आप जो चाहें करेंगे।’ सुप्रीम कोर्ट ने एल्विश यादव के वकील से पूछा, ‘हम वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट के तहत शिकायत को लेकर परेशान हैं।’
एल्विश यादव के वकील बोले- रेव पार्टी के कोई सबूत नहीं मिले
कोर्ट में एल्विश की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट मुक्ता गुप्ता ने दावा किया कि यूट्यूबर विवादित पार्टी में मेहमान बनकर गए थे। उन्होंने आगे दावा किया कि किसी रेव पार्टी का कोई सबूत नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट से पता चला है कि जांचे गए नौ सांप जहरीले नहीं थे।
अगली सुनवाई अब 19 मार्च 2026 को
इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य के वकील से यह बताने को कहा कि रेव पार्टियों में सांप का जहर कैसे निकाला जाता है और उसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है। अब इस मामले में अगली सुनवाई अब 19 मार्च 2026 को होगी।
क्या है एल्विश यादव का सांप का जहर (स्नेक वेनम) केस
यह मामला 3 नवंबर 2023 का है। नोएडा पुलिस ने एल्विश यादव और पांच अन्य के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की। पुलिस को एक कथित रेव पार्टी की टिप मिली थी। छापेमारी में कोबरा सहित नौ जहरीले सांप पाए गए। इन सांपों और सांप के जहर का इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध रेव पार्टियों में किया जाता था। यह मामला भाजपा सांसद मेनका गांधी के एनजीओ की शिकायत के आधार पर शुरू किया गया था, जिन्होंने एल्विश पर सांपों के साथ वीडियो शूट करने और सांप के जहर और ड्रग्स के साथ अनधिकृत पार्टियों की मेजबानी करने का आरोप लगाया था।
पुलिस का अंडरकवर ऑपरेशन, एल्विश यादव की गिरफ्तारी
पुलिस के एक अंडरकवर ऑपरेशन में पांच व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई, जिन्होंने एल्विश यादव को मास्टरमाइंड बताया। बाद में, 17 मार्च 2024 को, एल्विश यादव को पांच अन्य लोगों के साथ, रेव पार्टियों में सांप के जहर की व्यवस्था करने के लिए वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और भारतीय दंड संहिता की धारा 120 ए (आपराधिक साजिश) के तहत गिरफ्तार किया गया। इसके बाद, उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। बताया जाता है कि शुरुआत में एल्विश ने सांप के जहर की व्यवस्था करने की बात कबूल की। हालांकि, इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया।
गिरफ्तारी के एक हफ्ते बाद एल्विश यादव जमानत पर हुए रिहा
इसके बाद 20 मार्च 2024 को एल्विश यादव के खिलाफ जांच गोवा और पंजाब में अतिरिक्त मामलों तक फैल गई। 22 मार्च 2024 को एल्विश यादव को गौतम बुद्ध नगर जिला अदालत ने जमानत दे दी। एल्विश यादव को 50,000 के बेल बॉन्ड पर जमानत मिल गई। इस बारे में बात करते हुए, उनके वकील प्रशांत राठी ने तब कहा था, ‘इस केस में हमारी दलीलें थीं कि उन पर झूठा आरोप लगाया गया और उनसे या उनके दोस्तों से ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे NDPS एक्ट का उल्लंघन हुआ हो। कोर्ट ने उन्हें (एल्विश यादव) और उनके दो दोस्तों को 50,000 रुपये के दो-दो श्योरिटी पर जमानत दे दी है।’













