प्रेस रिलीज में लिखा गया है कि “ऐ पाकिस्तानी आर्मी के अधिकारियों और जवानों! आप इस पवित्र जमीन के रखवाले हैं जो शहीदों के खून और कायदे-आज़म मुहम्मद अली जिन्ना की पक्की इच्छाशक्ति से बनी है। आप सिर्फ सैनिक नहीं हैं, आप मुस्लिम देश पाकिस्तान का धड़कता दिल हैं, जिसे अल्लाह (SWT) ने इस्लाम, सम्मान और न्याय की रक्षा का ज़िम्मा सौंपा है।”
गाजा में सैनिकों को भेजने को लेकर पाकिस्तान सेना में होगा विद्रोह?
प्रेस रिलीज में आगे कहा गया है कि “फिर भी आज आपके सामने एक बहुत बड़ा धोखा मंडरा रहा है: गाजा के लिए ट्रंप के तथाकथित “बोर्ड ऑफ पीस” में पाकिस्तान की लीडरशिप और संस्थाओं का सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होना। इस बोर्ड में यहूदी (ज़ायोनिस्ट) और ईसाई साथ-साथ बैठे हैं, जो अल-कुद्स पर कब्ज़ा करने वालों को सही ठहरा रहे हैं, जबकि दबे-कुचले फिलीस्तीनियों की सच्ची आवाज को बाहर रखा गया है। अमेरिकी साम्राज्यवाद और ज़ायोनिस्ट डिजाइन से पैदा हुई इस संस्था में पाकिस्तान का शामिल होना, इस्लाम के दुश्मनों से हाथ मिलाने जैसा है। आपका शामिल होना पाकिस्तानी और मुस्लिम उम्माह न तो भूलेंगे और न ही माफ करेंगे।”
बगावत की चेतावनी देते हुए कहा गया है कि “हम अपनी मदर इंस्टीट्यूशन को यह सख्त, साफ और डरावनी चेतावनी देते हैं कि इस गठबंधन को तुरंत और बिना किसी शर्त के खारिज कर दो! अपनी पवित्र यूनिफॉर्म, अपने हथियार, अपना खून, या यहां तक कि इस धोखेबाजी के बोर्ड को अपनी खामोशी भी मत दो। कायदे-आजम की हमेशा रहने वाली मांग पर अड़े रहो, एक ऐसा पाकिस्तान जो मुस्लिम सम्मान, संप्रभूता और कब्जे वाली जमीनों की आजादी के लिए बिना किसी समझौते के खड़ा हो, पश्चिमी-ज़ायोनी स्कीमों का मोहरा बनकर नहीं।”
अगर मदर इंस्टीट्यूशन (पाकिस्तानी सेना) इस दबाव के आगे झुकता है और इस एंटी-इस्लामिक फोरम में यहूदियों और ईसाइयों के साथ हाथ मिलाता है तो देश न तो तुम्हें भूलेगा और न ही तुम्हें रोकेगा और हर सैनिक के मन में सबसे दर्दनाक सवाल उठेगा: एक सच्चा मुसलमान लड़ते हुए – या मस्जिद अल-अक्सा के ज़ालिमों के मकसद को पूरा करते हुए – शहादत कैसे पा सकता है?
असीम मुनीर पर मुस्लिम उम्माह को धोखा देने का आरोप
पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारियों की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में आगे लिखा गया है कि “तुम्हारे ईमान की नींव ही टूट जाएगी क्योंकि अल्लाह (SWT) कुरान में हुक्म देता है: “ऐ ईमान वालों, यहूदियों और ईसाइयों को दोस्त मत बनाओ। वे असल में एक-दूसरे के दोस्त हैं।” (सूरह अल-माइदा 5:51)। इंसानी हुक्म मानना जो अल्लाह के साफ हुक्मों के उलट हो, खुद बनाने वाले के खिलाफ बगावत है। हौसला बुरी तरह टूट जाएगा। निराशा जंगल की आग की तरह बैरकों, खाइयों और घरों में फैल जाएगी।
नतीजा बहुत बुरा होगा, गहरा गुस्सा, अंदरूनी फूट, अनुशासन में कमी और बगावत। ये पाकिस्तान के खिलाफ बगावत से नहीं, बल्कि इंसान के खराब हुक्मों पर अल्लाह के हुक्म की सख्त बात मानने से पैदा होगा।
खासकर लीडरशिप के लिए: तुम अल्लाह के सामने उस दिन जवाबदेह होगे जब न तो दौलत काम आएगी और न ही ओहदा। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, इस रास्ते से तौबा कर लो। शांति बोर्ड से हट जाओ। ज़ायोनी ताकतों या उनके मददगारों को कोई पहचान नहीं, कोई गठबंधन नहीं, कोई सहयोग नहीं। समझदारी से चुनें या इतिहास के गुस्से, अपने सैनिकों की नाराज़गी और अल-रहमान की नाराज़गी का सामना करें। — एग्जीक्यूटिव कमेटी, वेटरन्स ऑफ़ पाकिस्तान
नवभारत टाइम्स को खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान की सेना के अंदर भी गाजा में सैनिकों को भेजने को लेकर भारी गुस्सा देखा जा रहा है। कई बड़े सैन्य अधिकारी भी सरकार और आर्मी चीफ के खिलाफ हो रहे हैं। वहीं पूर्व सैन्य अधिकारियों ने अब खुलकर मोर्चा खोलना शुरू कर दिया है। ये शुरूआती बगावत के निशान हैं। शहबाज शरीफ फिलहाल अमेरिका में हैं और पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप से सेना भेजने के लिए कुछ मोहलत मांगी है। शहबाज शरीफ ने शायद घरेलू वजहों का हवाला दिया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक अगर सेना भेजने का फैसला लिया जाता है और वाकई सैनिकों को भेजा जाता है तो पाकिस्तानी सेना के कई सैन्य अधिकारी और पूर्व अधिकारी खुलेआम बगावत का बिगूल फूंक सकते हैं।













