फरीदा जलाल बताती हैं, ‘हमारे घर में तो सभी रोजा हैं। रमजान बरकतों का महीना होता है। खुशियों का महीना होता है। मुझे लगता है कि रोजे भी जरूरी हैं। खुद पर एक कंट्रोल करना, जिंदगी में लकीर खींचना, अपने उसूलों पर चलना, गुस्से पर कंट्रोल करना, प्यार ही प्यार बांटना, सबकी मदद करना, रमजान का महीना यह सब हमें सिखाता है।’
‘डॉक्टर कहते हैं रोजा मत रखिए’
जब उनसे पूछा गया कि क्या 76 साल की उम्र इसमें आड़े नहीं आती? यह पूछने पर वह जवाब देती हैं, ‘कभी-कभी मुश्किल होती है। डॉक्टर भी बोलते हैं कि आप रोजा मत रखिए, तो कभी-कभी हम नहीं भी रखते हैं, लेकिन जितना हो सके उतने रोजे रखते हैं।’
सलीम साहब से मिलने जाऊंगी
फरीदा जलाल को सलीम-जावेद की लिखी फिल्म ‘मजबूर’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला था। लेखक सलीम खान का माइनर ब्रेन हेमरेज हुआ, जिसके बाद से वह अस्पताल में भर्ती हैं। इस पर वह कहती हैं, ‘मैंने आज ही उनकी तबीयत का सुना है। मुझे उनकी फिक्र हो रही है और मैं उनसे मिलने अस्पताल जाना चाह रही हूं। मैं आज-कल में ही उनसे मिलने जाने का सोच रही हूं। सलीम-जावेद ने ‘मजबूर’ की स्क्रिप्ट बहुत ही बढ़िया लिखी थी, जिसमें मेरा रोल भी बहुत बढ़िया था।’
‘ओ रोमियो’ में फरीदा जलाल के मुंह से अपशब्द सुन मचा शोर
हिंदी सिनेमा में पिछले पांच दशक से पहले बहन, फिर मां और अब दादी जैसे रिश्तों में अपनायित भरने वाली अदाकारा फरीदा जलाल ‘ओ रोमियो‘ में शाहिद कपूर की दादी बनी हैं। इस बार वह पर्दे पर अपनी छवि से इतर पहली बार गाली देते नजर आईं। इस पर लोग जहां काफी हैरत में हैं, वहीं फरीदा जलाल का कहना है कि असल में लोग पूरा डायलॉग सही से सुने बिना सिर्फ गाली पर अटक गए हैं। फिल्म में एक सीन है, जहां वह शाहिद कपूर से कहती हैं, ‘इश्क में आशिक अगर तर जाए तो रोमियो, अगर मर जाए तो चू***’।’
‘मैंने कभी अपनी हद और लकीर पार नहीं की’
इस डायलॉग को लेकर छिड़ी चर्चा पर फरीदा जलाल कहती हैं, ‘मुझे बिल्कुल नहीं मालूम था कि इतना बवाल हो जाएगा। लोगों का ये रिएक्शन होगा, लेकिन मुझे इस बात की बेइंतहा खुशी है कि मैं अपनी वो साख, वो छवि बनाकर इतने साल चल सकी कि मैं कुछ लकीरें पार नहीं करूंगी। अपने हदूद (दायरे) में रहूंगी। इसमें भी आप देखें तो मैं अपने पोते को बता रही हूं कि तुम्हारे दादा जी ने ये बोला था। मेरा किरदार गाली नहीं दे रहा है, मगर यह बात कोई गौर से सुन ही नहीं रहा है।’
‘विशाल जी का पहला सवाल था- आप गाली देंगी ना?’
अपने रोल और सीन के ऑफर के दौरान के रिएक्शन के बारे में फरीदा जलाल कहती हैं, ‘मुझे निर्माता-निर्देशक साजिद नाडियाडवाला से बहुत प्यार है, मगर उन्होंने मुझे कभी अपनी फिल्म में नहीं लिया तो मुझे हमेशा उनसे शिकायत रही कि वह मेरे लिए क्यों नहीं सोचते? मुझे क्यों नहीं लिया?, फिर विशाल भारद्वाज के साथ काम करना तो हर किसी का ख्वाब होता है। यह हर एक्टर की विशलिस्ट में होता है और मेरी ये ख्वाहिश तब पूरी हुई जब मुकेश छाबड़ा उनको मेरे घर लेकर आए, मगर विशाल जी ने मुझसे सबसे पहला सवाल यही पूछा- ‘फरीदा जी आप गाली देंगी ना?’ सोचो, मेरा क्या हाल हुआ होगा? (हंसती हैं) मैं इंतजार कर रही हूं कि ये इंसान आए और मुझे फिल्म ऑफर करे और फिर जब फिल्म ऑफर हुई तो आते ही उन्होंने ये बात कही।’
फरीदा जलाल बोलीं- मैं छोटी छोटी गाली दूंगी
फरीदा जलाल आगे बताती हैं, ‘अब मैं क्या करती? जाने देती विशाल जी को? बिल्कुल नहीं, मैंने उनसे पूछा कि गंदी-गंदी गाली तो नहीं होंगी ना, तो उन्होंने कहा कि नहीं-नहीं, छोटी-छोटी होंगी, क्योंकि गुस्से वाली दादी है। मैंने कहा- ठीक है सर, छोटी-छोटी गाली दूंगी, पर पूरी फिल्म में कहीं कोई गाली नहीं है। उस डायलॉग में भी वो उसके दादा की बात बता रही है। दूसरी लाइन तो आप लोग सुन ही नहीं रहे हो, गाली गाली कह रहे हो।’













