भारतीय वायु सेना के हिसाब से प्लानिंग
ब्राजील की एम्ब्रेयर और महिंद्रा ग्रुप के नए फैसले की जानकारी देते हुए महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने एक्स पर लिखा है, ‘यह सुनिश्चित करने के लिए कि ये शानदार विमान इंडियन एयर फोर्स के लिए हमेशा कीमती और भरोसेमंद बने रहें…।’
अक्टूबर, 2025 में बनी रणनीतिक साझेदारी
एम्ब्रेयर और महिंद्रा की ओर से हुई यह घोषणा अक्टूबर, 2025 में इनके बीच हुए उस रणनीतिक साझेदारी पर आधारित है, जिसके तहत दोनों कंपनियों की भारत में मिलकर C‑390 मिलेनियम मल्टी-मिशन मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के उत्पादन की योजना है।
भारत सरकार के मेक इन इंडिया पर आधारित
दोनों कंपनियों की ओर से साझा बयान में कहा गया है कि वह इसके माध्यम भारतीय वायु सेना के मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम को भारत में ही उत्पादन करके केंद्र सरकार के मेक इन इंडिया अभियान को मजबूत करना चाहते हैं, साथ ही साथ यहीं पर इसकी सर्विसिंग और मेंटेनंस का इंतजाम भी करना चाहते हैं।
C‑390 मिलेनियम की अधिकतम क्षमता 26 टन
इनके अनुसार उनकी योजना के तामील होने पर भारत में रोजगार पैदा होने, टेक्नोलॉजी ट्रांसपर और इसके एयरोस्पेस इकोसिस्टम में तेजी आने की उम्मीद है। इनके अनुसार C‑390 मिलेनियम अपने क्लास में सबसे एडवांस मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट में से एक है। इसकी पेलोड क्षमता 26 टन तक है। साथ ही साथ अन्य मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के मुकाबले स्पीड और रेंज भी अधिक है।
अस्थायी और कच्चे रनवे पर भी लैंडिंग-टेकऑफ
C‑390 मिलेनियम एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल माल ढोने, सैनिकों को लाने-ले जाने, एयरड्रॉपिंग, मेडिकल इमरजेंसी, खोज और बचाव अभियानों, अग्निशमन और मानवीय मिशन में किया जा सकता है और इसे अस्थायी और कच्चे रनवे पर भी लैंडिंग और टेकऑफ करवाया जा सकता है। इस ट्रांसपोर्ट विमान में हवा में ही इंधन भरने की सुविधा भी जोड़े जाने की व्यवस्था है।
एयर फोर्स और बीसएफ कर रही इस्तेमाल
भारत में ब्राजील की एम्ब्रेयर कंपनी की 11 तरह के 50 विमान संचालन में हैं, जो कि कमर्शियल, डिफेंस और बिजनेस से जुड़े कामों में इस्तेमाल हो रहे हैं। इसके कुछ विमान अभी भी वायु सेना और बीएसएफ मुख्य तौर पर वीआईपी के लिए इस्तेमाल कर रही हैं।













