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  • ‘वंदे मातरम’ विवाद पर अनु कपूर बोले- अगर लगता है कि ये प्रार्थना हिंदू की है तो आपको प्रॉब्लम क्या है

    राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम विवाद को लेकर एक्टर अनु कपूर ने अपनी बातें रखी हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसके तहत अब सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और आधिकारिक आयोजनों में इसके सभी 6 अंतरे को गाना अनिवार्य होगा। इसे लेकर ही विवाद


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    By Azad Hind Desk फरवरी 21, 2026
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    राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम विवाद को लेकर एक्टर अनु कपूर ने अपनी बातें रखी हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसके तहत अब सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और आधिकारिक आयोजनों में इसके सभी 6 अंतरे को गाना अनिवार्य होगा। इसे लेकर ही विवाद गहराता जा रहा है। अब अनु कपूर ने कहा है कि यह सरकार का एक शानदार फैसला है और मैं 32 वर्षों से अधिक समय से इसपर कह रहा हूं।

    अनु कपूर ने कहा, ‘बहुत अच्छा निर्णय लिया। ये कमाल का अद्भुत निर्णय है। और ये आज लिया गया है? अन्नू कपूर तो आज 32 साल पहले से वंदे मातरम का उद्घोष करता रहा है। तो अच्छी बात है। आज लोग फॉलो करते हैं, वंदे मातरम का अभिवादन करते हैं। आप अमेरिका के किसी व्यक्ति से ईस्ट कोस्ट के न्यूजर्सी के न्यूयॉर्क के, कुछ एलए के, कुछ कैलिफोर्नियां के दो-चार, पांच भाइयों-बहनों से मिलें और उनके मुंह से अगर वंदे मातरम का उद्घोष सुन लें तो समझिएगा कि ये बीमारी उनको अनु कपूर से लगी है।’

    ‘जब मैंने किया था, दुबई की शूटिंग में तो कुछ लोगों ने ऑब्जेक्शन उठाया’

    उन्होंने आगे कहा, ‘हिमांशु व्यास और न जाने कितने मित्र हैं अमेरिका में जो अभिवादन वंदे मातरम के साथ ही करते हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि आज से 32 साल पहले हरि ओम नाद, 94 में…जब मैंने किया था, दुबई की शूटिंग में तो कुछ लोगों ने ऑब्जेक्शन उठाया था। मैंने कहा कि भाई मैं तो हरि ओम नाद ही कर सकता हूं, मैं वंदे मातरम ही कर सकता हूं। आप मेरा कार्यक्रम देखिए, किया था ज़ी टीवी के ऊपर। उन्होंने न उसका मूल्य नहीं किया तो क्या हुआ, हमने तो किया जो हमको करना था। थोड़ा कुछ इधर-उधर होगा तो.. मैंने कहा कि गोली मारनी हो तो मार दो यार, वंदे मातरम कहके मरूंगा मैं। कोई प्रॉब्लम नहीं है मुझे।’

    ‘जब मैं कहता हूं कि ऐ अल्लाह मेरे हाल देख’

    अनु कपूर ने कहा, ‘स्वर्गीय परमूज्य पंडित बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय की ये अमर रचना ही हमारा राष्ट्रगान है, हमारा राष्ट्र गीत है वंदे मातरम। इसपर किसी को ऑब्जेक्शन होना ही नहीं चाहिए। क्यों पंडित जी ने कहा- सुफलाम, इसका मतलब समझे आप? सफलत शब्द का इस्तेमाल क्यों नहीं किया? सफल मतलब एक ऐसा वृक्ष जिसपर फल आ गया वो सफल हो गया। तो आपने इतने बुरे काम किए हैं, अगर आपके पेड़ के जड़ों के अंदर जहर है तो उसके ऊपर भी फल आएंगे लेकिन जहरीले फल आएंगे। यहां पर पंडित बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ये उद्घोष करते हैं कि वंदे मातरम सुजलाम सुफलाम…मेरे उत्तम आचरण और कर्मों का फल मुझे देना। अगर मेरे कर्म अच्छे हों तभी देव माता मुझे फल देना, मुझे गलत कामों का फल नहीं देना। ये मैं पूरे भारतवासियों को कहना चाहता हूं, समझें इस बात को क्यों पंडित जी ने वंदे मातरम सुजलाम सुफलाम…मेरे अच्छे ईमानों का ही अंजाम देना। जब मैं कहता हूं कि ऐ अल्लाह मेरे हाल देख, ये उर्दू में भी इस बात को कह रहा हूं। जब मैं कहता हूं कि ऐ अल्लाह मेरे हाल देख, हुक्म ये होता है पहले अपने तू ईमान देख। अपने कर्म देख तू, मेरे कर्म अच्छे हों उसी का मुझे फल देना। अगर मेरे कर्म पापी के हों तो जलाकर भस्म कर देना।’

    ‘अगर आपको लगता है कि ये प्रार्थना हिंदू की है तो आपको प्रॉब्लम क्या है’

    इसके अलावा अनु कपूर ने कहा, ‘संस्कृत विश्व की प्राचीनतम भाषा है, उससे भी प्राचीन भाषा हो वो तमिल है। लेकिन वो भी हमारे देश की भाषा है। वो अमेरिका की भाषा नहीं है। इस संस्कृत भाषा के अंदर बहुत ही कमाल का साहित्य है, वेद-पुराण, उपनिशद लिखे गए हैं, महाभारत है, रामायण है, न जाने कितने उपनिशद हैं। तो ये सारे संक्कृत भाषा में लिखे गए हैं, संस्कृत में ही ये प्रार्थना है और अगर आपको लगता है कि ये प्रार्थना हिंदू की है तो आपको प्रॉब्लम क्या है, हिंदू क्या प्रार्थना नहीं कर सकता है? और हिंदू प्रार्थना करेगा तो वो केवल अपने कल्याण की बात नहीं करेगा, समस्त विश्व के कल्याण की बात करेगा।। अगर पूरे विश्व में सारा जो एटॉमिक हो रहा है, परमाणु बम का विस्फट हो रहा है, पूरे विश्व में जो हिंसा फैली हुई है, अगर कोी भूले-भटके कोई शांति की लहर आई तो उस हवा के झोंके केवल भारत भूमि से आएंगे। क्योंकि यहीं पर अहिंसा का भी पाठ पढ़ाया जाता है।’

    ‘हमारे धर्म का जो दर्शन है, हमें वो अहिंसा और शांति का संदेश तो देती है’

    उन्होंने ये भी कहा, ‘मैं ऐसा नहीं कहूंगा कि समय बदल चुका है। बेसिकली हमारा धर्म, हमारे धर्म का जो दर्शन है, हमें वो अहिंसा और शांति का संदेश तो देती है परंतु साथ-साथ कुरुक्षेत्र के मैदान में अगर आप कृष्ण को देखें और उससे सीख सकें..तो परिवर्तन के साथ ही व्यक्ति को अपना आचरण और दृष्टिकोण चेंज करना पड़ेगा। हम शांति का यज्ञ करेंगे लेकिन हमारे चारो तरफ एके 47 और बज़ुका रहेगी, टैंक खड़े रहेंगे…वो इसलिए कि हमारी शांति यज्ञ में कोई बाधा न डाले।’

    वंदे मातरम पर नए सरकारी फैसले

    स्कूल और सरकारी कार्यक्रमों में अब सिर्फ शुरुआत के दो छंद नहीं, बल्कि पूरे 6 छंद गाए जाएंगे।
    ‘जन गण मन’ (राष्ट्रगान) से पहले ‘वंदे मातरम’ प्रस्तुत किया जाएगा।
    वंदे मातरम गाते समय सभी का सावधान मुद्रा में खड़े रहना अनिवार्य है।
    सिनेमा हॉल को इस नियम के दायरे से बाहर रखा गया है।
    पूरे 6 छंदों के गायन की कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है।

    मुस्लिम नेताओं ने कहा- थोपने से नेशनल इंटीग्रेशन को नुकसान

    इस फैसले के बाद से राजनीति की दुनिया में पारा गरम हो गया है। आलोचकों का तर्क है कि गीत के बाद के छंदों में धार्मिक प्रतीकवाद है, जो धर्मनिरपेक्ष संवैधानिक सिद्धांतों के साथ विरोधाभास रखता है। वहीं एआईएमआईएम (AIMIM) और अन्य मुस्लिम नेताओं ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही किसी को भी गीत गाने के लिए बाध्य न करने का आदेश दिया था। इसे थोपने से नेशनल इंटीग्रेशन को नुकसान हो सकता है।

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