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  • मार्गदर्शन तब तक अधूरा रहता है, जब तक आप बुद्धि-विवेक से सही निर्णय नहीं लेते

    ज्योतिष, वास्तु और अध्यात्म प्राचीन विज्ञान है, जो ऊर्जा के सिद्धांतों पर आधारित है। आधुनिक समय में इन प्राच्य विद्याओं का प्रयोग वर्तमान सामाजिक गतिविधि एवं शिक्षा के साथ करने पर आज भी इनका प्रभाव लाभदायक होता है। अपने सर्वश्रेष्ठ गुणों को जानो- अपनी विलक्षण योग्यता को प्रोत्साहित करो और बाक़ियों को सींचते रहो, सभी


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    By Azad Hind Desk फरवरी 22, 2026
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    ज्योतिष, वास्तु और अध्यात्म प्राचीन विज्ञान है, जो ऊर्जा के सिद्धांतों पर आधारित है। आधुनिक समय में इन प्राच्य विद्याओं का प्रयोग वर्तमान सामाजिक गतिविधि एवं शिक्षा के साथ करने पर आज भी इनका प्रभाव लाभदायक होता है।

    अपने सर्वश्रेष्ठ गुणों को जानो- अपनी विलक्षण योग्यता को प्रोत्साहित करो और बाक़ियों को सींचते रहो, सभी लोग किसी न किसी क्षेत्र में नाम कमा लेते यदि वे जानते कि वह क्या कुछ कर गुज़र सकते थे। ज्योतिष शास्त्र प्रत्येक व्यक्ति की सहायता करता है, ताकि वह अपने सर्वश्रेष्ठ गुणों को समाज के सामने प्रस्तुत कर सके। सर्वश्रेष्ठ व्यवसाय का चयन करना हो, अथवा जीवनसाथी का सही चयन, ज्योतिष शास्त्र का मार्गदर्शन आपके लिए कल्याणकारी है।

    अतिशयोक्ति से कभी कार्य मत कीजिए- अतिशयोक्तियों से सत्य का मान कम होता है और आप के विवेक पर संदेह होता है। विद्वानों के अनुसार दूरदर्शी लोग संयम से काम लेते हैं और नाप तोल कर बात कहते हैं। किसी भी चीज़ का अतिशय मूल्यांकन करना एक तरह का झूठ है, इससे अच्छी अभिरुचि और बुद्धिमत्ता की ख्याति को नुकसान पहुंच सकता है।

    उपायों एवं अपने जीवन के रहस्यों को सार्वजनिक न करें- पाश्चात्य लेखकों का मानना है कि अधिक स्पष्ट होना न तो लाभदायक है और न ही रुचिकर। इसलिए तुरन्त अपना मत व्यक्त न करके आप लोगों को अनुमान लगाने के लिए छोड़ दीजिए। घोषित होने पर सभी संकल्प आलोचना को आमंत्रित कर बैठते हैं, यदि वे अच्छे सिद्ध न हुए तो आप का दुर्भाग्य दुगुना हो जाएगा।

    अपने आसपास के लोगों के अनुरूप ढलिए- जिस चीज़ के लिए जितना प्रयास चाहिए उससे अधिक न कीजिए, प्रतिदिन दिखावा मत कीजिए, नहीं तो लोग ध्यान देना बंद कर देंगे, कोई न कोई नवीनता बची रहनी चाहिए।

    विज्ञान के अनुसार जिस वस्तु को बनने में जितनी मात्रा की ऊर्जा लगी है, उस वस्तु को बिगड़ने या विध्वंस होने पर उतनी ही मात्रा की ऊर्जा निकलेगी। यानी जिस व्यक्ति या वस्तु से जितनी मात्रा का सुख मिलता है, उसके विपरीत होने पर या उसके अभाव से या उसके खो जाने पर उसी व्यक्ति या वस्तु से उतनी ही मात्रा का दुःख मिलेगा, न एक प्रतिशत कम न एक प्रतिशत ज्यादा।

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