भारत का दूसरा सबसे बड़ा डिफेंस सप्लायर
इजरायल और भारत की दोस्ती में रक्षा सहयोग सबसे अहम है। इजरायल भारत का दूसरा सबसे बड़ा डिफेंस सप्लायर है। भारत के हथियार फंडार में इजरायल की रैम्पेज मिसाइल, हारोप और स्काई स्ट्राइकर लॉइटरिंग म्यूनिशन, क्रिस्टर मेज 2 मिसाइल, DRDO और हेरॉन Mk2 UAV के साथ मिलकर डेवलप किया गया बराक-8 MRSAM सिस्टम शामिल है।
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इजरायली हथियारों का इस्तेमाल किया था, जिन्होंने पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों और एसेट्स को तबाह करने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके पहले 2019 के बालाकोट स्ट्राइक के दौरान भी भारतीय एयरफोर्स ने आतंकी ठिकानों पर हमला करने के लिए SPICE-2000 बमों का इस्तेमाल किया था। इजरायल भारत में निर्माण के लिए भारतीय कंपनियों के साथ भी काम कर रहा है।
भारत-इजरायल जॉइंट वेंचर
- अडानी डिफेंस ने साल 2016 में हैदराबाद में एक उत्पादन सुविधा बनाकर हर्मीस 900 ड्रोन को बनाने के लिए इजरायल के एल्बिट सिस्टम के साथ जाइंट वेंचर बनाया था।
- अडानी डिफेंस इजरायली हथियार इंडस्ट्री के साथ मिलकर Tvor TAR-21, X-95 Tavor, Negev लाइट मशीन गन, गैलील ACE असॉल्ट राइफल, गैलील DMR और Masada पिस्तौल जैसे छोटे हथियार भी बनाती है।
- 2020 में भारतीय सेना के लिए 16479 Negev NG-7 LMG का कॉन्ट्रैक्ट किया गया था।
इजरायल के साथ डिफेंस खरीद
- इजरायल से भारत बड़ी डिफेंस खरीद कर सकता है। इनमें वेपन प्लेटफॉर्म की संभावना कम है, लेकिन IAI रैम्पेज, एयर लोरा बैलिस्टिक मिसाइल, आइस ब्रेकर मिसाइल और राफेल SPICE-1000 बम जैसी हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें जॉइंट वेंचर के तहत खरीदी या को-प्रोड्यूस की जा सकती हैं।
- LCA तेजस और दूसरे एयर प्लेटफॉर्म के लिए एडवांस एवियोनिक्स पर भी विचार किया जा सकता है। कई जॉइंट तकनीकी कौलेबोरेशन पर भी हस्ताक्षर की संभावना है।














