पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्ला तरार ने पहले बताया कि रात पर चले हमलों में अफगानिस्तान के अंदर सात ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस कार्रवाई को पाकिस्तान के अंदर हाल के चरमपंथी हमलों का जवाब बताया गया। एक पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि एयरस्ट्राइक में 80 से ज्यादा चरमपंथी मारे गए। वहीं, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत दर्जनों लोग मारे गए।
राष्ट्रपति जरदारी की चेतावनी
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान की हालिया कार्रवाई सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को लेकर बार-बार दी गई चेतावनियों के बाद की गई है, जिन पर ध्यान नहीं दिया गया। जरदारी ने कहा कि तालिबान के शासन ने अफगानिस्तान में 9/11 से पहले वाला या उससे भी बुरी हालात बना दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान के अंदर खून-खराब जारी रहा तो जिम्मेदार लोग पहुंच से बाहर नहीं होंगे।
अफगानिस्तान पर हो सकते हैं और हमले
अफगानिस्तान-पाकिस्तान के इलाके में स्वतंत्र सिक्योरिटी रिसर्चर अब्दुल सईद ने अरब न्यूज से कहा कि पाकिस्तान आगे भी हवाई हमले कर सकता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान मौजूदा नीति बातचीत से ज्यादा मिलिट्री फोर्स के इस्तेमाल को प्राथमिकता देती है। ऐसे में अफगानिस्तान में ऐसे हवाई हमले जारी रहने की संभावना है। इस्लामाबाद का कहना है कि अफगान तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद पाकिस्तान में चरमपंथी हिंसा बढ़ गई है। इसने अफगान अधिकारियों पर TTP के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है। तालिबान इससे इनकार करता है और हिंसा को पाकिस्तान की अंदरूनी समस्या बताता है।
पाकिस्तानी हमले कर सकते हैं उल्टा नुकसान
अफगानिस्तान में पाकिस्तान पूर्व विशेष प्रतिनिधि रहे आसिफ दुर्रानी ने कहा कि मौजूदा तालिबान सरकार TTP को नियंत्रित करने को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि इन हमलों ने एक साफ संदेश दिया है कि बॉर्डर पार की पनाहगाहें अब मंजूर नहीं होंगी। हालांकि, काबुल की तरफ का मानना है कि ऐसे हमले अफगानिस्तान में पाकिस्तान विरोधी भावना को और भड़का सकते हैं।
काबुल स्थित विश्लेषक तमीम बहिस इसे अलग नजरिए से देखते हैं। उन्होंने कहा कि चरमपंथी हिंसा को लेकर पाकिस्तान की निराशा समझ आती है लेकिन अफगानिस्तान के अंदर हवाई हमलों से पाकिस्तान के खिलाफ भावना को बढ़ावा मिलेगा। ऐसा होता है तो काबुल के लिए पाकिस्तान में काम करने वाले समूहों के खिलाफ कार्रवाई करना राजनीतिक रूप से और भी मुश्किल हो सकता है।
अक्टूबर जैसी जंग का खतरा
पिछले साल अक्टूबर में इसी तरह के हालात के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जंग भड़क उठी थी। पाकिस्तान ने 9 अक्टूबर को अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों के साथ ही काबुल में हवाई हमला कर दिया था। ये हमले ठीक उसी दिन हुए थे, जब तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी भारत के दौर पर पहुंचे थे। इसके बाद अफगान बलों ने सीमा पार घुसकर पाकिस्तानी चौकियों पर हमला बोला। करीब एक सप्ताह तक चले सैन्य टकराव में दोनों तरफ से सैकड़ों लोग मारे गए थे। इसके बाद तुर्की और कतर की कोशिशों से युद्धविराम हो सका था। अब एक बार फिर तनाव उसी दिशा में जाता दिख रहा है।













