नखीनां च नदीनां च शृंगीणां शस्त्रपाणिनाम्।
विश्वासो नैव कर्तव्यो स्त्रीषु राजकुलेषु च ।।
अपने इस श्लोक में चाणक्य ने उन लोगों का जिक्र किया है, जिनपर आपको बिलकुल भी भरोसा नहीं करना चाहिए। आचार्य का मानना है कि बड़े-बड़े नाखूनों वाले शेर और चीते जैसे प्राणियों और विशाल नदियों से हमेशा दूर ही रहना चहिए। बड़े-बड़े सींग वाले जानवरों से भी बचकर रहना चाहिए। इसके अलावा अपने पास शस्त्र रखने वाले और जो राजा के करीबियों पर बिलकुल भी भरोसा नहीं करना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने स्त्रियों से भी दूरी बनाकर रखने की बात कही है।
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि बड़े-बड़े नाखूनों वाले हिंसक प्राणी से बचकर रहना चाहिए। ऐसे जानवर कब आपके ऊपर हमला कर दे। वहीं, जिन नदियों के तट पक्के नहीं होते उनपर भी विश्वास नहीं किया जा सकता। इन नदियों का वेग कब प्रचंड रूप धारण कर ले और कब उनकी दिशा बदल जाए कोई नहीं जानता। इसलिए इन नदियों के किनारे रहने वाले लोग हमेशा उजड़ते रहते हैं। वहीं, बड़े-बड़े सींग वाले पशुओं का भी भरोसा नहीं है, कौन जाने उनका मिजाज कब बिगड़ जाए।
इन तीन लोगों से दूर रहने में ही भलाई
चाणक्य नीति में कहा गया है कि जिस व्यक्ति के पास तलवार या कोई हथियार है उसका भी भरोसा नहीं किया जा सकता। ऐसा व्यक्ति छोटी-सी बात पर क्रोध में आकर कभी भी आक्रामक हो सकता है। चंचल स्वभाव वाली स्त्रियों पर भी विश्वास नहीं करना चाहिए। वह अपनी चतुरता से कभी भी आपके लिए प्रतिकूल परिस्थितियां पैदा कर सकती हैं। वहीं, राजा से संबंधित राज सेवकों और राजकुल के व्यक्तियों पर भी विश्वास करना उचित नहीं है। वे कभी भी राजा के कान भरकर आपका अहित करवा सकते हैं।














