ईपीएफओ के करीब 31.86 लाख इनऑपरेटिव अकाउंट्स हैं जिनमें कुल 10,903 करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें से 7.11 लाख अकाउंट्स में 1,000 रुपये तक जमा है और यह कुल राशि 30.52 करोड़ रुपये है। मंत्रालय के मुताबिक इनमें से कुछ अकाउंट 20 साल पुराने हैं जिनमें तीन साल से कोई ट्रांजैक्शन नहीं हुआ है। इस कारण ये इनऑपरेटिव हो गए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के लिए जिन सात लाख अकाउंट्स की पहचान की गई है, उनमें आधार और बैंक अकाउंट लिंक हैं। इससे ईपीएफओ के लिए सब्सक्राइबर्स के अकाउंट में पैसे डालना आसान होगा।
EPF अकाउंट पर मिल सकता है तगड़ा ब्याज, करोड़ों लोगों को होगा फायदा, क्या है सरकार का प्लान?
सरकार की पहल
ईपीएफ एंड एमपी एक्ट के मुताबिक ईपीएफओ मेंबर्स को अपना पैसा निकालने के लिए क्लेम करना होता है। लेकिन यह देखने में आया है कि कई मामलों में पीएफ अकाउंट में पैसा बहुत कम है। इसलिए मेंबर्स की इनमें दिलचस्पी नहीं है। इससे ईपीएफओ के पास बड़ी मात्रा में अनक्लेम्ड डिपॉजिट और इनऑपरेटिव अकाउंट्स हो गए हैं। इसलिए सरकार ने खुद ही यह पहल की है।
प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए पीएफ एक अनिवार्य सरकारी बचत योजना है। इसमें कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा कंट्रीब्यूट करता है जबकि कंपनी भी इतना हो योगदान देती है। एम्प्लॉयर के कंट्रीब्यूशन में से 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है। ईपीएफ अकाउंट में जमा रकम पर ब्याज मिलता है।













