सीतारमण ने कहा कि भारत में सोना हमेशा से घरेलू निवेशकों के लिए पसंदीदा निवेश रहा है, चाहे संपत्ति के रूप में हो या आभूषण के तौर पर। घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत, सोने का शुद्ध आयातक है। उन्होंने कहा, ‘हम इस पर नजर रखे हुए हैं। भारत में सोने में निवेश और खरीदारी की प्रवृत्ति को देखते हुए यह अभी चिंताजनक स्तर तक नहीं पहुंचा है। आरबीआई भी इस पर नजर रखेगा।’
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क्यों बढ़ रही कीमत?
आरबीआई बोर्ड को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में सीतारमण ने कहा कि भारत में घरेलू खपत के लिए सोने की मांग परंपरागत रूप से त्योहारों के मौसम, अक्षय तृतीया आदि के दौरान बढ़ जाती है। इसके अलावा, आज अधिकतर देशों के केंद्रीय बैंक सोना और चांदी खरीद रहे हैं और उनका भंडारण कर रहे हैं।
इस बीच आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अप्रैल-दिसंबर, 2025 के दौरान कीमतों में वृद्धि को आयातित सोने की मात्रा में कमी ने काफी हद तक संतुलित कर दिया था। उन्होंने कहा, ‘केवल जनवरी में मूल्य व मात्रा दोनों में अचानक उछाल आया है। हम इन आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं। मांग में मौसमी उतार-चढ़ाव भी रहता है।’
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चालू खाते का घाटा
मल्होत्रा ने कहा कि अप्रैल-दिसंबर, 2025 के दौरान कीमतों में वृद्धि को आयातित सोने की मात्रा में कमी ने कमोबेश संतुलित कर दिया था। मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई इस स्थिति को लेकर अनावश्यक रूप से चिंतित हीं है, क्योंकि भारत का बाह्य क्षेत्र मजबूत है। उन्होंने कहा, ‘चालू खाते का घाटा (कैड) हमारे अनुमानों के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के करीब एक प्रतिशत के दायरे में है, जो प्रबंधनीय है।’
इससे पहले दिन में वित्त मंत्री ने आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की 621वीं बैठक को संबोधित किया, जिसकी अध्यक्षता संजय मल्होत्रा ने की। निदेशक मंडल ने भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वित्तीय बाजार की अस्थिरता से उत्पन्न चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक एवं घरेलू आर्थिक परिदृश्य की समीक्षा की। वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट 2026-27 को रणनीतिक दृष्टि को रेखांकित किया।













