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  • ‘बेटे का अंतिम संस्कार मां का मौलिक अधिकार’, SC ने दुबई में हुई मौत पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब

    नई दिल्ली: क्या मृतक के धर्म और उससे जुड़े रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करना उसके परिजनों का मौलिक अधिकार है? यह सवाल उस समय उठा जब एक मां ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है कि उनके बेटे का शव विदेश में बिना अंतिम संस्कार के जला दिया गया। यह मामला तब सामने आया


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    By Azad Hind Desk फरवरी 24, 2026
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    नई दिल्ली: क्या मृतक के धर्म और उससे जुड़े रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करना उसके परिजनों का मौलिक अधिकार है? यह सवाल उस समय उठा जब एक मां ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है कि उनके बेटे का शव विदेश में बिना अंतिम संस्कार के जला दिया गया। यह मामला तब सामने आया जब यूएई के शारजाह में काम कर रहे एक भारतीय युवक की मौत हो गई और उसके परिवार को उसके अंतिम संस्कार की रस्में पूरी नहीं करने दी गईं।

    उत्तर प्रदेश के बस्ती में रहने वाली 57 वर्षीय सावित्री ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनका 29 वर्षीय बेटा पंकज, जो पिछले दो वर्षों से यूएई के शाहजाह स्थित वर्ल्ड स्टार कंपनी में कारपेंटर के तौर पर काम कर रहा था। वह दो दिसंबर से लापता हो गया था, मां ने 10 जनवरी को बस्ती पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    दुबई में ही कर दिया गया मृतक का अंतिम संस्कार

    मां ने कोर्ट को बताया कि इसके बाद चार फरवरी उन्हें दुबई स्थित भारतीय दूतावास से फोन आया। दूतावास ने बताया कि पंकज की मौत हो गई है और उनके शव को वहीं जला दिया गया है। सावित्री की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय एम नूली ने जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच को बताया कि एक मां होने के नाते उन्हें अपने बेटे का अंतिम संस्कार ठीक से करवाने का हक है।

    अंतिम संस्कार का हक छीनना मौलिक अधिकार का उल्लंघन: वकील

    वकील ने कहा, ‘अंतिम संस्कार एक संस्कार है, जो किसी भी स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता। मां के इस अधिकार को छीनना संविधान के अनुच्छेद 21 और 25 के तहत मौलिक और मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।’ इस पर बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और 16 मार्च तक जवाब मांगा है।

    इस केस से यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी मृत व्यक्ति के धर्म और रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करवाना उसके परिजनों का मौलिक अधिकार है।

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