राष्ट्रपति भवन में एडविन लुटियंस की प्रतिमा की जगह राजगोपालाचारी की प्रतिमा लगाए जाने पर पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘भारत को अपने इतिहास के प्रति इस विकृत और बेबुनियाद आक्रोश को जारी रखने से क्या लाभ होता है? क्या है औपनिवेशिक काल के इस दाग को मिटाने की निरंतर सनक है?
विपक्ष ने क्या कहा?
इल्तिजा मुफ्ती ने आगे कहा, लुटियंस ने ही दिल्ली को आज का स्वरूप दिया है। प्रतिमाओं को हटाने से विरासत या इतिहास को नहीं मिटाया जा सकता है। भारत की अधिकांश स्थापत्य कला कृतियां ब्रिटिश और मुगल काल की हैं।
बीजेपी बोली- औरंगजेब जिंदाबाद वाली मानसिकता
पीडीपी नेता के इस पोस्ट को शेयर करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि जो कभी आतंकवादी बुरहान वानी का महिमामंडन करते थे, वे आज घबराए हुए हैं। उन्होंने आगे कहा, वोट बैंक की राजनीति के लिए वही ‘औरंगजेब जिंदाबाद’ वाली मानसिकता भारत द्वारा अपनी सभ्यतागत विरासत को पुनः प्राप्त करने और गुलामी की मानसिकता को त्यागने को पचा नहीं पा रही है।
शशि थरूर ने की तारीफ
वहीं विपक्ष में एक अलग रुख अपनाते हुए, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राजगोपालाचारी को मिली इस मान्यता का स्वागत किया। उन्होंने कहा, ‘राजाजी को राष्ट्रपति भवन में प्रतिमा से सम्मानित होते देखकर मुझे बहुत खुशी हुई है। गणतंत्र बनने से पहले, वे भारत के एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल के रूप में राष्ट्रपति भवन के पहले भारतीय अधिपति थे और उन्होंने अपना पद नए राष्ट्रपति को सौंप दिया था। मैं हमेशा से उनके विचारों का प्रशंसक रहा हूं और अपने छात्र जीवन में उनकी स्वतंत्र पार्टी का प्रबल समर्थक था।’
वहीं राजाजी की प्रतिमा के अनावरण के बाद राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि यह पहल औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को मिटाने और भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत, शाश्वत परंपराओं को गर्व से अपनाने तथा भारत माता की सेवा में असाधारण योगदान देने वालों को सम्मानित करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की श्रृंखला का हिस्सा है।













