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  • ताइवान से मात्र 110 किमी दूर मिसाइल तैनात करेगा जापान, चीन हर धमकी का करारा जवाब देगा बुद्ध का देश

    टोक्‍यो: चीन से लगातार मिल रही धमकियों के बीच जापान ने बड़ा ऐलान किया है। जापान अपने योनागुनी द्वीप पर सतह से हवा मे मार करने वाली मिसाइलों को तैनात करेगा। यह द्वीप ताइवान की सीमा से मात्र 110 किमी दूर है। जापान के रक्षा मंत्री शिनजिरो कोइजूमी ने मंगलवार को ऐलान किया कि मार्च


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    By Azad Hind Desk फरवरी 25, 2026
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    टोक्‍यो: चीन से लगातार मिल रही धमकियों के बीच जापान ने बड़ा ऐलान किया है। जापान अपने योनागुनी द्वीप पर सतह से हवा मे मार करने वाली मिसाइलों को तैनात करेगा। यह द्वीप ताइवान की सीमा से मात्र 110 किमी दूर है। जापान के रक्षा मंत्री शिनजिरो कोइजूमी ने मंगलवार को ऐलान किया कि मार्च 2031 तक इन मिसाइलों की तैनाती कर दी जाएगी। ऐसा पहली बार हुआ है जब जापान ने खुलकर बता दिया है कि वह इस तरह की मिसाइलों की तैनाती ताइवान के पास कब करेगा। जापान के इस कदम पर अब चीन बुरी तरह से भड़क सकता है। इससे पहले चीन ने जापानी पीएम के बयान के बाद तीखा जुबानी हमला बोला था। जापानी रक्षा मंत्री ने कहा कि इन मिसाइलों की तैनाती योनागुनी द्वीप पर जरूरी सुविधाओं के निर्माण पर निर्भर करेगा।

    जापान के रक्षा मंत्री शिनजिरो कोइजूमी ने कहा, ‘हम साल 2030 के वित्‍त वर्ष तक मिसाइल तैनात करने की योजना बना रहे हैं।’ इस मिसाइल केंद्र को द्वीप के पूर्वी इलाके में बनाया जायगा। यहीं पर जापान की जमीनी सेना का बेस पहले से मौजूद है। बता दें कि चीन का दावा है कि ताइवान उसका अभिन्‍न हिस्‍सा है और वह इसका फिर से अपने देश से एकीकरण करेगा। जापान का यह योनागुनी द्वीप साफ दिनों में ताइवान के तट से दिखाई देता है। जापान और चीन के बीच पिछले साल नवंबर महीने से ही तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। उस समय जापान की पीएम सनाई ताकैची ने कहा था कि अगर ताइवान पर हमला होता है तो जापानी अपनी सेना को सक्रिय कर देगा।

    चीन जापान को यूं धमका रहा

    इस बात की लंबे समय से आशंका जताई जा रही है कि ताइवान पर अगर कोई भी हमला होता है जो कि अमेरिका का गठबंधन सहयोगी है, तो इसके सीधे वॉशिंगटन बनाम बीजिंग की जंग में बदलने का खतरा है। यही नहीं इसमें बाद में जापान जैसे इलाके में अमेरिका के सहयोगी देशों के भी शामिल होने का खतरा पैदा हो जाएगा। जापानी पीएम के बयान के बाद चीन के साथ उसके रिश्‍ते हाल के वर्षों में सबसे निचले स्‍तर पर पहुंच गए हैं। चीन कई तरह से जापान पर दबाव बना रहा है। इसमें युद्धपोत भेजना, रेअर अर्थ का निर्यात रोकना, चीनी पर्यटकों को जापान जाने से रोकना और अपने पांडा को वापस ले लेना शामिल है।

    जापानी रक्षामंत्री ने जब यह ऐलान किया, उसके ठीक एक दिन पहले ही चीन ने जापान की 20 कंपनियों पर निर्यात बैन लगा दिया था। चीन ने इसके पीछे राष्‍ट्रीय सुरक्षा चिंता वजह बताई है। कोईजुमी ने कहा कि इस द्वीप को मध्‍यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस किया जाएगा। ये मिसाइलें फाइटर जेट से लेकर मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम होंगी। चीन ने अभी जापान के इस ऐलान पर कोई बयान नहीं दिया है। जापानी रक्षामंत्री ने नवंबर में जब इस द्वीप की यात्रा की थी तो चीन ने कहा था कि जापान क्षेत्रीय तनाव पैदा करना चाहता है और सैन्‍य टकराव को भड़काना चाहता है।

    चीन और जापान की सेनाएं आमने-सामने

    इसके कुछ दिन बाद ही चीन ने अपने ड्रोन को इस द्वीप के पास भेजा था ताकि जापान को कड़ा संदेश दिया जा सके। इसके जवाब में जापान ने फाइटर जेट उड़ाए थे। चीन की धुर विरोधी जापानी पीएम को इसी महीने हुए चुनाव में भारी जीत हासिल हुई है। इसके बाद से पीएम तकैची जापान की आत्‍मरक्षा करने की ताकत तो बहुत तेजी से बढ़ाने में जुट गई हैं। विश्‍लेषकों का कहना है कि जापान यहीं पर नहीं रुकने जा रहा है। जापान इस द्वीप को फ्रंट लाइन के रूप में देखता है और इसकी रक्षा के लिए तैयारी कर रहा है।

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