इसी तरह एम्फी के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी के अंत में म्यूचुअल फंड्स की टॉप आईटी शेयरों में होल्डिंग्स की वैल्यू 3,55,600 करोड़ रुपये थी जो 24 फरवरी को घटकर 2,80,933 करोड़ रुपये रह गई है। इस तरह चार हफ्तों में उनकी होल्डिंग्स की वैल्यू में 74,666 करोड़ रुपये की गिरावट आई है। संभव है कि म्यूचुअल फंड्स और एलआईसी ने इस महीने आईटी शेयरों में अपनी हिस्सेदारी में कमी या बढ़ोतरी की है। म्यूचुअल फंड्स का आंकड़ा अगले महीने आएगा जबकि एलआईसी का शेयरहोल्डिंग डेटा अप्रैल में पता चलेगा।
₹1.9 लाख करोड़ स्वाहा! आईटी शेयरों का कत्लेआम, अमेरिका से डील के बावजूद क्यों आई गिरावट?
किसमें कितनी हिस्सेदारी
इन्फोसिस और टीसीएस में एलआईसी और म्यूचुअल फंड्स की भारी हिस्सेदारी है। दिसंबर तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक एलआईसी की इन्फोसिस में 11.3%, टीसीएस में 5.3%, टेक महिंद्रा में 11.5% और एलटीआईमाइंडट्री में 9.6% हिस्सेदारी है। इस महीने इन्फोसिस में 23% गिरावट आई है। इस दौरान टीसीएस में 18% और एचसीएल टेक, परसिसटेंड सिस्टम्स, टेक महिंद्रा, कोफोर्ज और एलटीआईमाइंडट्री में कम से कम 20 फीसदी गिरावट आई है।
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का कहना है कि आईटी शेयरों में अभी गिरावट का दौर जारी रहने की आशंका है। इनमें अपने मौजूदा स्तर से 65% तक गिरावट आ सकती है। ब्रोकरेज ने इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक, एमफेसिस, एलटीआईमाइंडट्री और हेक्सावेयर को डाउनग्रेड कर दिया है। जेफरीज के एनालिस्ट्स ने एक नोट में कहा कि एआई के उभार से आईटी कंपनियों का बिजनेस सर्विसेज से कंसल्टिंग की तरफ जा सकता है। यह ट्रेंड आगे बढ़ता जाएगा और इसके लिए आईटी कंपनियों को अपने टेलेंट और ऑपरेटिंग मॉडल में भी बदलाव की जरूरत होगी।














