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  • लेख: पिता बनाना चाहते थे डॉक्टर, फिर बेटे ने क्यों कर दी उनकी हत्या, लखनऊ हत्याकांड से समाज को क्या सीख लेनी चाहिए

    नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का डेटा बताता है कि 2013 से 2023 के बीच, एक दशक में स्टूडेंट्स के आत्महत्या करने की दर 65% बढ़ गई। इन सुसाइड के पीछे मुख्य वजहें रहीं पढ़ाई का प्रेशर और सामाजिक-पारिवारिक-आर्थिक दबाव। लेकिन, लखनऊ में जिस तरह का अपराध हुआ है, उसके पीछे केवल पढ़ाई का दबाव नहीं।


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    By Azad Hind Desk फरवरी 25, 2026
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    नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का डेटा बताता है कि 2013 से 2023 के बीच, एक दशक में स्टूडेंट्स के आत्महत्या करने की दर 65% बढ़ गई। इन सुसाइड के पीछे मुख्य वजहें रहीं पढ़ाई का प्रेशर और सामाजिक-पारिवारिक-आर्थिक दबाव। लेकिन, लखनऊ में जिस तरह का अपराध हुआ है, उसके पीछे केवल पढ़ाई का दबाव नहीं। यह परिवारों में बढ़ती संवादहीनता और मानसिक स्वास्थ्य की विफलता का संकेत है।

    दबा हुआ गुस्सा

    पुलिस जांच के मुताबिक, पैथोलॉजी लैब संचालक पिता चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बने। वह उस पर NEET क्लियर करने का दबाव बना रहे थे। घटना वाले दिन भी दोनों में बहस हुई। 21 साल के बेटे ने पिता को गोली मारी और फिर शव को छुपाने के लिए उसके कई टुकड़े किए। कुछ टुकड़ों को बाहर ले जाकर फेंकना, कुछ को घर में ड्रम में छिपाना, छोटी बहन को डरा-धमकाकर चुप रखना और पुलिस के सामने पहले पिता के लापता होने और फिर खुदकुशी की कहानी पेश करना बताता है कि यह केवल आवेश में उठाया गया कदम नहीं था।

    करियर का दबाव

    कैसे एक बेटे के भीतर इतनी नफरत भर सकती है कि वह अपने पिता के साथ इतनी नृशंस वारदात को अंजाम दे! क्या ‘कुछ बनने’ का दबाव इतना भारी हो सकता है कि उसके आगे रिश्ते दरक जाएं? हर माता-पिता चाहते हैं कि उनकी संतान करियर में अच्छा करे, लेकिन कई बार इसकी वजह से ऐसा अनदेखा दबाव पनपता है, जिसका अंदाजा समय रहते नहीं लग पाता। इस मामले में कई और वजहें भी होंगी, जो धीरे-धीरे जुड़ती चली गईं और इस भयावह वारदात का कारण बनीं – जिनका पता जांच में चलेगा।

    टूटते सपने

    भारत में NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों युवाओं के लिए उम्मीद का रास्ता हैं। लेकिन, यह भी सच है कि इन परीक्षाओं के साथ असाधारण दबाव जुड़ा होता है। NEET में पिछले साल 23 लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जबकि JEE मेन 2026 सेशन-1 में 13.55 लाख रजिस्ट्रेशन थे। इनमें से बहुत थोड़े होते हैं, जिन्हें अच्छे संस्थानों में प्रवेश मिल पाता है। हर साल कोटा जैसे कोचिंग हब से स्टूडेंट्स के खुदकुशी की खबरें आती हैं।

    सामाजिक संवाद

    इस घटना का दूसरा बड़ा पहलू सामाजिक है। आरोपी स्टूडेंट की मां का निधन हो चुका है। हालांकि घर में चाचा-चाची भी हैं। अगर घर में लगातार संवाद होता, युवक की मनोस्थिति को समझने की कोशिश की जाती, तो हो सकता है कि बात यहां तक न पहुंचती।

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