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  • इजरायल ने जब अमेरिका के खिलाफ जाकर की पाकिस्तान से युद्ध में उलझे भारत की मदद, पूर्व राजदूत ने बताया किस्सा

    तेल अवीव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इजरायल के दौरे पर पहुंचे हैं। इसके चलते इजरायल और भारत के रिश्ते पर काफी बातें हो रही हैं। दोनों देशों के बीच हालिया समय में संबंधों में बेहतरी आई है लेकिन भारत और इजरायल के बीच जुड़ाव काफी पुराना है। यही वजह है कि इजरायल और भारत


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    By Azad Hind Desk फरवरी 25, 2026
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    तेल अवीव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इजरायल के दौरे पर पहुंचे हैं। इसके चलते इजरायल और भारत के रिश्ते पर काफी बातें हो रही हैं। दोनों देशों के बीच हालिया समय में संबंधों में बेहतरी आई है लेकिन भारत और इजरायल के बीच जुड़ाव काफी पुराना है। यही वजह है कि इजरायल और भारत में औपचारिक संबंधों की बहाली के पहले से सहयोग रहा है। दोनों देशों के बीच एक समय ऐसा भी आया, जब इजरायल ने अमेरिका की मर्जी के खिलाफ भारत की सैन्य मदद की।

    जॉर्डन, लीबिया और माल्टा में भारत के राजदूत रहे अनिल त्रिगुणायत ने एनडीटीवी में लिखे लेख में इंडिया-इजरायल संबंधों पर बात की है। अनिल बताते हैं कि 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान इजरायल के दिल्ली के साथ फॉर्मल डिप्लोमैटिक रिश्ते नहीं थे। इजरायल का सबसे खास सहयोगी अमेरिका खुलकर पाकिस्तान के साथ था। इसके बावजूद इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री गोल्डा मीर ने अमेरिका के विरुद्ध जाकर सीक्रेट तरीके से भारत की जरूरी सैन्य मदद की।

    पाकिस्तान की न्यूक्लियर साइट पर हमले का प्लान

    त्रिगुणायत के मुताबिक, 1971के बाद इजरायल ने 1980 के दशक की शुरुआत में भारत से पाकिस्तान के कहूटा न्यूक्लियर प्लांट पर हमले के लिए मदद मांगी थी। इजरायल की कोशिश पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करने की थी, ताकि उसे परमाणु बम बनाने से रोका जा सके। इजरायल ने अपने फाइटर जेट के लिए भारतीय एयरस्पेस और रिफ्यूलिंग प्लांट इस्तेमाल करने की परमिशन मांगी।

    इजरायल की ओर से पेश इस प्लान को पाकिस्तान की बदले की कार्रवाई के डर से टाल दिया गया क्योंकि यह एक पूर्ण युद्ध की वजह बन सकता था।यह प्लान हकीकत नहीं बना लेकिन इजरायल का ऑफर हिम्मत वाला जियोपॉलिटिकल कदम था। यह प्लान पाकिस्तान के परमाणु बम हासिल करने से पश्चिम एशिया पर असर को लेकर इजरायल की चिंताओं से प्रेरित था। ये हुआ होता को शायद पाकिस्तान कभी परमाणु ना बना पाता।

    इजरायल और भारत के औपचारिक रिश्ते

    भारत और इजरायल में कई तरह के सहयोग के बाद 1992 में आखिरकार ऑफिशियल डिप्लोमैटिक रिश्ते बने। इसके बाद दोनों देशों को रिश्ते में भरोसा बढ़ा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इजरायल का भारत को सपोर्ट एक मजबूत और स्थिर रिश्ते को दिखाता है। दोनों देशों में अब एक स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप साफ दिखती है।

    प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे पर भारत का लक्ष्य टेक्नोलॉजी खरीद से आगे बढ़कर तकनीक में साझेदारी होनी चाहिए। उम्मीद है कि पीएम नरेंद्र मोदी का दौरा कई समझौतों और रणनीतिक संस्थागत व्यवस्थाओं के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा। साथ ही शांति और कूटनीति के जरिए नाजुक क्षेत्रीय ढांचे को स्थिर करने में मदद करेगा।

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