उशपिज ने द जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा है कि “उन्हें (पीएम मोदी) सच में इजरायल पसंद है। वे इसकी तारीफ करते हैं। मुझे लगता है कि हमारे पास ऐसे ज्यादा देश नहीं हैं जिन्हें हम रणनीतिक भागीदार का टाइटल दे सकें, लेकिन भारत के साथ यह बिल्कुल सही है।” पीएम मोदी ने 2014 में सत्ता में आने के बाद इजरायल और भारत के संबंध हमेशा के लिए बदलकर रख दिए हैं। साल 1947 में भारत ने इजरायल के खिलाफ वोट किया था और 4 दशकों तक फिलीस्तीन के समर्थन में भारत की आवाजें उठीं, लेकिन अब भारत पहले अपने हितों को देख रहा है। बार बार युद्ध ने दिखाया है कि इजरायल एक सच्चे दोस्त की तरह भारत के साथ खड़ा रहा है।
एक दूसरे की जरूरतों को पूरा करते भारत-इजरायल!
उशपिज ने कहा कि दोनों देश अब “आपसी जरूरतों और क्षमताओं में एक-दूसरे के पूरक हैं।” इजरायली अखबार ने लिखा है कि “मोदी पाकिस्तानी न्यूक्लियर ब्लैकमेल से डरे या हैरान नहीं हुए।” डेगन एमॉस ने कहा कि “कानून के हिसाब से भारत एक सेक्युलर मल्टीकल्चरल देश है और असल में जब मोदी 2014 में आए तो उन्होंने कहा “हिंदू धर्म सेंटर में है” और उस बयान का मतलब बाकी सब कुछ था।” जेरूशलम पोस्ट ने लिखा है कि मोदी ने “मेक इंडिया ग्रेट अगेन” एजेंडे को आगे बढ़ाया। जिसकी खासियत तेज डिजिटाइजेशन और इकोनॉमिक मूवमेंट है। करप्शन और चलन में नकली पैसे से लड़ने के एक विवादित कदम उठाया जिसमें 500 और 1,000 रुपये के करेंसी नोट को वापस लेने का ऐलान कर दिया।
इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर, जो US का प्रोजेक्ट है, UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजराइल के ज़रिए इंडिया को यूरोप से जोड़ने वाले एक ट्रेड रूट की सोच रखता है। मोदी इसकी वकालत करते हैं। उशपिज ने जोर देकर कहा कि “भारत के बिना कोई IMEC नहीं है।” उन्होंने कहा कि “यह कम्युनिकेशन, सामान बनाने और एनर्जी की बहुत, बहुत बड़ी भूख का बड़ा हब है।” मोदी के पास अभी भी हाई अप्रूवल रेटिंग है। पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ उनकी पार्टनरशिप मजबूत लगती है। इजरायली अखबार ने लिखा है कि शायद यही वजह है कि पीएम मोदी इजरायल को काफी पसंद करते हैं।













