• International
  • नेतन्याहू से दोस्ती, विश्वास और जरूरत, मोदी डॉक्ट्रिन ने कैसे बदले भारत-इजरायल संबंध, इजरायली एक्‍सपर्ट से समझें

    नई दिल्ली/तेल अवीव: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2017 में पहली बार इजरायल का दौरा कर इतिहास रच दिया था। जब वो बेन-गुरियन एयरपोर्ट पर उतरे तो वो ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे। इजरायल जाकर मोदी ने भारत की दशकों पुरानी हिचकिचाहट को तोड़ दिया था। मोदी ने उस समय कहा था कि “यह


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk फरवरी 25, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्ली/तेल अवीव: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2017 में पहली बार इजरायल का दौरा कर इतिहास रच दिया था। जब वो बेन-गुरियन एयरपोर्ट पर उतरे तो वो ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे। इजरायल जाकर मोदी ने भारत की दशकों पुरानी हिचकिचाहट को तोड़ दिया था। मोदी ने उस समय कहा था कि “यह दौरा हमारी दोस्ती के रिश्तों को फिर से मजबूत करने का एक मौका है।” उन्होंने कहा था कि “इजरायल का यह जबरदस्त दौरा करने वाला भारत का पहला प्रधानमंत्री बनना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है।” इजरायल विदेश मंत्रालय के पूर्व डायरेक्टर-जनरल (2011 से 2014 तक भारत में इजरायल के राजदूत और एलन इंटरनेशनल ब्रिजवेज के मौजूदा CEO) एलन उशपिज का कहना है कि नई दिल्ली के लहजे में बदलाव साफ और निजी था।

    उशपिज ने द जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा है कि “उन्हें (पीएम मोदी) सच में इजरायल पसंद है। वे इसकी तारीफ करते हैं। मुझे लगता है कि हमारे पास ऐसे ज्यादा देश नहीं हैं जिन्हें हम रणनीतिक भागीदार का टाइटल दे सकें, लेकिन भारत के साथ यह बिल्कुल सही है।” पीएम मोदी ने 2014 में सत्ता में आने के बाद इजरायल और भारत के संबंध हमेशा के लिए बदलकर रख दिए हैं। साल 1947 में भारत ने इजरायल के खिलाफ वोट किया था और 4 दशकों तक फिलीस्तीन के समर्थन में भारत की आवाजें उठीं, लेकिन अब भारत पहले अपने हितों को देख रहा है। बार बार युद्ध ने दिखाया है कि इजरायल एक सच्चे दोस्त की तरह भारत के साथ खड़ा रहा है।

    एक दूसरे की जरूरतों को पूरा करते भारत-इजरायल!
    उशपिज ने कहा कि दोनों देश अब “आपसी जरूरतों और क्षमताओं में एक-दूसरे के पूरक हैं।” इजरायली अखबार ने लिखा है कि “मोदी पाकिस्तानी न्यूक्लियर ब्लैकमेल से डरे या हैरान नहीं हुए।” डेगन एमॉस ने कहा कि “कानून के हिसाब से भारत एक सेक्युलर मल्टीकल्चरल देश है और असल में जब मोदी 2014 में आए तो उन्होंने कहा “हिंदू धर्म सेंटर में है” और उस बयान का मतलब बाकी सब कुछ था।” जेरूशलम पोस्ट ने लिखा है कि मोदी ने “मेक इंडिया ग्रेट अगेन” एजेंडे को आगे बढ़ाया। जिसकी खासियत तेज डिजिटाइजेशन और इकोनॉमिक मूवमेंट है। करप्शन और चलन में नकली पैसे से लड़ने के एक विवादित कदम उठाया जिसमें 500 और 1,000 रुपये के करेंसी नोट को वापस लेने का ऐलान कर दिया।

    इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर, जो US का प्रोजेक्ट है, UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजराइल के ज़रिए इंडिया को यूरोप से जोड़ने वाले एक ट्रेड रूट की सोच रखता है। मोदी इसकी वकालत करते हैं। उशपिज ने जोर देकर कहा कि “भारत के बिना कोई IMEC नहीं है।” उन्होंने कहा कि “यह कम्युनिकेशन, सामान बनाने और एनर्जी की बहुत, बहुत बड़ी भूख का बड़ा हब है।” मोदी के पास अभी भी हाई अप्रूवल रेटिंग है। पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ उनकी पार्टनरशिप मजबूत लगती है। इजरायली अखबार ने लिखा है कि शायद यही वजह है कि पीएम मोदी इजरायल को काफी पसंद करते हैं।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।