रिपोर्ट में कहा गया है कि ये कार्रवाई ताकतवर सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC), रीजनल थिएटर कमांड, हथियार खरीदने वाली संस्थाओं और डिफेंस एकेडेमिया तक चल रही हैं और अभी तक ये कार्रवाई पूरी नहीं हुई है। लंदन में मौजूद IISS ने अपने सालाना मिलिट्री बैलेंस में कहा है कि “ऑर्गेनाइजेशनल नजरिए से जब तक खाली पद नहीं भरे जाते PLA अपने कमांड स्ट्रक्चर में गंभीर कमियों के साथ काम कर रहा है।” हालांकि, चीनी डिफेंस मिनिस्ट्री ने अभी तक इन दावों पर कोई जवाब नहीं दिया है और शायद ही कोई जवाब भी दे। यह रिपोर्ट चीन के दो सबसे ऊंचे रैंक वाले जनरलों के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में फंसने के बाद सामने आई है।
चीन की सेना में चल रहा सफाई अभियान
पिछले महीने पता चला था कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बहुत पुराने साथ झांग यूशिया, जो चीनी सेना के शीर्ष अधिकारियों में शामिल थे उन्हें पिछले साल अक्टूबर में सेना से बाहर निकाल दिया गया था। इसके अलावा हे वेइदोंग को भी सेना से बाहर निकाल दिया गया था। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है और उनके खिलाफ जांच चल रही है। इस कार्रवाई के बाद चीन की सात सदस्यों वाली CMC में अब सिर्फ 2 सदस्य ही रह गये हैं। एक राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जो बॉडी के चेयरमैन हैं और दूसरे, नए प्रमोट हुए वाइस चेयरमैन झांग शेंगमिन।
रिपोर्ट्स के मुताबिक सैन्य अधिकारियों के खिलाफ सैन्य कॉन्ट्रैक्ट में धांधली, खराब हथियारों की खरीददारी और गलत कनेक्शन की वजह से कार्रवाई चल रही है। 100 से ज्यादा हाई लेवल अधिकारी अभी तक लापता किए जा चुके हैं। ऐसे में चीन की सेना की क्षमता पर इस कार्रवाई का असर पड़ना तय माना जा रहा है। हालांकि इसके बावजूद सेना के आधुनिकीकरण का काम अभी भी जारी है और ये जारी ही रहने वाला है। रिपोर्ट में इंडो-पैसिफिक में बीजिंग की बढ़ती मिलिट्री पावर, खासकर 2025 में ताइवान के आसपास तैनाती बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है, जो इलाके के दावों और डिप्लोमैटिक फायदे को मजबूत करने की कोशिशों का हिस्सा है।
चीन लगातार बढ़ा रहा है सैन्य खर्च
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस महीने की शुरुआत में चीन की आर्म्ड फोर्स को एक वर्चुअल संबोधन में इस कार्रवाई को लेकर एक छोटा सा दुर्लभ जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि “पिछला साल असामान्य और बहुत खास रहा है।” राष्ट्रपति ने कहा था कि “पीपल्स आर्मी ने अपनी पॉलिटिकल एजुकेशन को और गहरा किया है अलग-अलग रिस्क और चैलेंज को असरदार तरीके से हैंडल किया है और करप्शन के खिलाफ लड़ाई में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं।” IISS के मुताबिक, मिलिट्री बजट में ग्लोबल उछाल के बीच चीन का डिफेंस खर्च दूसरे एशियाई देशों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। कुल रीजनल डिफेंस खर्च में इसका हिस्सा 2025 में लगभग 44% तक पहुंच गया है जो 2010 और 2020 के बीच औसतन 37% था।














