आमलकी एकादशी का महत्व
पंड़ित राकेश झा ने बताया कि आंवले के पेड़ में भगवान का वास माना जाता है। आंवले के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश वास करते हैं। आमलकी एकादशी के दिन लक्ष्मी नारायण के साथ साथ आंवले के पेड़ की पूजा करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण में भी आमलकी एकादशी व्रत की कथा और महिमा का वर्णन मिलता है।
आमलकी एकादशी तिथि समय ( Amalaki Ekadashi 2026 )
| आमलकी एकादशी तिथि का आरंभ 26 फरवरी | रात में 12 बजकर 34 मिनट पर |
| आमलकी एकादशी तिथि का समापन 27 फरवरी | रात में 10 बजकर 33 मिनट पर |
| आमलकी एकादशी व्रत का पारण 28 फरवरी | सुबह में 8 बजकर 14 मिनट से 9 बजकर 40 मिनट पर |
आमलकी एकादशी पूजन सामग्री
1) एक लकड़ी की चौकी
2) सुपारी
3) कलश
4) हल्दी
5) लौंग
6) फूल
7) पंच पल्लव आम के पत्ते
8) कलावा
9) सिंदूर
10) बेलपत्र
11) तुलसी दल
12) प्रसाद के लिए मिठाई
13) आंवले का वृक्ष
आमलकी एकादशी पूजा विधि पद्म पुराण से
1) पद्म पुराण के अनुसार, आमलकी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
2) अब भगवान सूर्यदेव को जल अर्पित करके मन में व्रत का संकल्प लें।
3) इसके बाद मंदिर की अच्छे से सफाई करके एक लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं।
4) अब एक कलश में पानी भरकर उसमें पंच पल्लव रखें और अंदर जल में सुपारी, जायफल, अक्षत, हल्दी आदि चीजें डाल दें।
5) चौकी पर भगवान विष्णु माता लक्ष्मी और भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। स्थापना से पहले सभी को स्नान कराकर वस्त्र जरुर अर्पित कर दें।
6) इसके बाद घी का दीपक प्रज्वलित करें और विष्णु भगवान को अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें। फिर भगवान शिव और माता पार्वती को अक्षत और बेलपत्र अर्पित करें।
7) अब आमलकी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। इसके बाद आरती उतारें।
8) अब आंवले के पेड़ के पास जाएं और आसपास अच्छे से सफाई कर दें। इसके बाद आंवले के पेड़ की कम से कम 7 या 108 बार परिक्रमा करें।
9) अब आंवले के पेड़ को अर्घ्य दें नमस्ते देवदेवेश जामदग्न्य नमोञउस्तु ते। गृहाणाध्यमिम॑ दत्तमामलक्या युते हरे॥
10) इसके बाद घर आकर सभी को प्रसाद दें।














