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  • क्लाइमेट चेंज से बदल रहा बाघों का मिजाज,पिछले कुछ सालों हमलों के मामले भी बढ़े

    नई दिल्ली: सीएसई की ‘स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट’ (एसओई 2026) रिपोर्ट में बुधवार को बाघों के बदलते मिजाज पर बात की गई है। जलवायु परिवर्तन की वजह से बाघों के व्यवहार में भी बदलाव हो रहे हैं। उनके आवासों में आ रहे पारिस्थितिक बदलाव, आवाजों में दखलअंदाजी और बिगड़ी दशा भारत के बाघों में व्यवहारिक


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    By Azad Hind Desk फरवरी 26, 2026
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    नई दिल्ली: सीएसई की ‘स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट’ (एसओई 2026) रिपोर्ट में बुधवार को बाघों के बदलते मिजाज पर बात की गई है। जलवायु परिवर्तन की वजह से बाघों के व्यवहार में भी बदलाव हो रहे हैं। उनके आवासों में आ रहे पारिस्थितिक बदलाव, आवाजों में दखलअंदाजी और बिगड़ी दशा भारत के बाघों में व्यवहारिक बदलाव ला रही हैं।

    कब करते हैं इंसानों पर हमला

    रिपोर्ट के अनुसार बाघ बहुत कम ही आदतन नरभक्षी बनते हैं। बाघों मनुष्यों पर हमला और उनके खाने की कोशिश तब करते हैं जब वे बूढे़ या घायल हो गए होते हैं। सीएसई की रिपोर्ट के अनुसार बाघों की संख्या बढ़ रही है। है। जंगलों के पास रहने वाली मानव आबादी भी बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार बाघों की आबादी वाले 20 राज्यों में बाघों के लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र में छह करोड़ लोग रहते हैं।

    मुआवजे पर भी आया विरोधाभास सामने

    रिपोर्ट के अनुसार जब कोई बाघ मवेशी मारता है तो मवेशी मालिक को अक्सर पर्याप्त मुआवजा मिलता है। इससे एक विरोधाभास पैदा होता है। कुछ क्षेत्रों में इसी वजह से बाघों की पशुधन हानि को बहुत अधिक नापसंद नहीं किया जाता है। मुआवजे की वजह से बाघ गांव की अर्थव्यवस्था का एक अनकहा हिस्सा बन जाते हैं।

    तीन सालों में हुए इतने हमले

    2026 की एसओई की रिपोर्ट कहती है कि पूरे भारत में जनवरी-जून 2025 तक टाइगर रिजर्व के आसपास के इलाकों में लगभग 43 लोग मारे गए हैं। वहीं 2024 में इन्हीं महीनों में, 44 लोगों ने बाघों के हमलों में अपनी जान गंवाई जबकि 2025 में 43 हमलों में से चार में, बाघों ने शरीर के कुछ हिस्सों पर हमला किया था।

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