नवग्रह और उनसे जुड़े मंत्र
| ग्रह | मंत्र |
| सूर्य | ओम ह्रां हीं हीं सः सूर्याय नमः |
| चंद्रमा | ओम श्रीं श्रीं श्रीं चन्द्राय नमः |
| मंगल | ओम क्रां क्रीं की स. भौमाय नमः |
| बुध | ओम ब्रां ब्रीं श्रीं सः बुधाव नमः |
| बृहस्पति | ओम प्रां प्री ग्रौं सः गुरुवे नमः |
| शुक्र | ओम द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः |
| शनि | ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः |
| राहु | ओम भ्रां श्रीं श्रीं सः राहवे नमः |
| केतु | ओम खां सीं सौं सः केतवे नमः |
सूर्य को मजबूत करने का मंत्र
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। सूर्य की कृपा से ही व्यक्ति को जीवन में मान सम्मान, नौकरी और समृद्धि मिलती है। ऐसे में सूर्यदेव के मंत्र ‘ॐ ह्रां हीं हीं सः सूर्याय नमः’ का जाप करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है।
चंद्रमा को मजबूत करने का मंत्र
चंद्रमा को मन, भावनाओं और सुख-समृद्धि का कारक माना जाता है। कुंडली में इसकी स्थिति कमजोर होने पर कलह, मानसिक विकार दुर्बलता, धन की कमी जैसी समस्याएं सामने पैदा होती हैं। कुंडली में चंद्रमा को मजबूत बनाने के लिए ‘ॐ श्रीं श्रीं श्रीं चन्द्राय नमः’ मंत्र का जप करना चाहिए।
मंगल को मजबूत करने का मंत्र
मंगल को साहस और पराक्रम का कारक ग्रह माना जाता है। जन्म कुंडली में मंगल के कमजोर होने पर जातक के साहस और ऊर्जा में निरंतर कमी रहती है। कुंडली मंगल को मजबूत करने के लिए मंगल के मंत्र ‘ॐ क्रां क्रीं की स. भौमाय नमः’ का जप करना चाहिए।
बुध को मजबूत करने का मंत्र
वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को सबसे प्रबल ग्रह माना जाता है। कुंडली में बुध मजबूत हो तो जीवन में तरक्की और प्रसिद्धि प्राप्त होती है। ऐसे में बुध को मजबूत करने के लिए ‘ॐ ब्रां ब्रीं श्रीं सः बुधाव नमः’ मंत्र का जप करना चाहिए।
बृहस्पति को मजबूत करने का मंत्र
कुंडली में बृहस्पति के शुभ प्रभाव से व्यक्ति को धन लाभ, सुख-सुविधा, सौभाग्य और लंबी आयु प्राप्त होती है। बृहस्पति कमजोर हो तो वैवाहिक जीवन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बृहस्पति को मजबूत करने के लिए ‘ॐ प्रां प्री ग्रौं सः गुरुवे नमः’ मंत्र का जप करना चाहिए।
शुक्र को मजबूत करने का मंत्र
वैदिक ज्योतिष में शुक्र को भौतिक सुख-सुविधाओं और प्रेम का कारक माना जाता है। कुण्डली में शुक्र मजबूत होने पर जातक को सभी तरह की सुविधा मिलती है। शुक्र को मजबूत करने के लिए ‘ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः’ मंत्र का जप करना चाहिए।
शनि को मजबूत करने का मंत्र
ज्योतिष में शनिदेव को कर्मफलदाता और न्याय का देवता कहा जाता है। अगर कुंडली में शनि कमजोर होता है तो जातक को जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन परेशानियों से बचने के लिए शनि ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः’मंत्र का जप करना चाहिए।
राहु को मजबूत करने का मंत्र
ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह माना जाता है। यह जीवन में अचानक होने वाली घटनाओं का कारक होता है। कुंडली में राहु की अशुभ स्थिति होने पर जातक को सफलता आसानी से नहीं मिलती। जीवन से तनाव को दूर करने और राहु को मजबूत करने के लिए राहु के मंत्र ‘ॐ भ्रां श्रीं श्रीं सः राहवे नमः’ का जप करना चाहिए।
केतु को मजबूत करने का मंत्र
कुंडली में केतु की कमजोर स्थिति होने पर जातक को जीवन भर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जीवन में कलह बनी रहती है। वैदिक ज्योतिष में केतु को वैराग्य और अचानक लाभ-हानि का कारण माना गया है। ऐसे में जीवन में कलह से बचने के लिए केतु के मंत्र ‘ॐ खां सीं सौं सः केतवे नमः’ का जप करना चाहिए।














