एएमयूटीवी की रिपोर्ट में कहा गया है कि लाली रहस्यमय तरीके से मारा गया है। ऑफिशियली हार्ट अटैक को उसकी मौत बताई गई है लेकिन किसी विदेशी ताकत के रोल की भी चर्चा है। इसकी वजह पाकिस्तान और अफगानिस्तान का बढ़ता तनाव है। तालिबान का इस्लामाबाद से तनाव चरम पर है तो दिल्ली से उसके रिश्ते सुधर रहे हैं। यह भी दावा है कि लाली अब पाकिस्तान की बजाय काबुल के करीब था, यही उसकी मौत की वजह बन गया।
कश्मीर में खून बहाने का जिम्मेदार था लाली
हाजी लाली मामा नूरजई की मौत से एक ऐसा आदमी इस क्षेत्र से हट गया है, जो अफगान और कश्मीरी मिलिटेंट नेटवर्क में गहराई से जुड़ा हुआ था। साथ ही यह अफगानिस्तान में पाकिस्तान के घटते असर और तालिबान की प्रैक्टिकल फॉरेन पॉलिसी की निशानी है। काबुल अब पाकिस्तान के चंगुल से निकलता दिख रहा है।
पाकिस्तान की ISI ने वर्षों से कश्मीर और अफगानिस्तान में प्रॉक्सी वॉर बनाए रखने के लिए लाली नूरजई और उस जैसे लोगों का इस्तेमाल किया है। लाली सुसाइड ट्रेनिंग कैंप और गुरिल्ला नेटवर्क बनाने में माहिर था। उसके ये ट्रेनिंग कैंप ISI के नापाक मकसदों को पूरा करते थे। आईएसआई ने जमकर उसका इस्तेमाल किया था।
पाकिस्तान की कमजोर होती स्थिति
तालिबान ने 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से पाकिस्तान की दखल को कम करने की कोशिश की है। काबुल की सरकार डिप्लोमेसी, लेजिटिमेसी और इंटरनेशनल पहचान पर जोर दे रहे हैं। भारत तक काबुल ने हालिया महीनों में काफी तेजी से पहुंच बनाई है। तालिबान ने पाकिस्तान के साथ बंधने के बजाय प्रैक्टिकल सोच दिखाई है।
भारत लंबे समय से यह कहता रहा है कि पाकिस्तान का टेरर नेटवर्क इलाके को अस्थिर करता है। नूरजई का मामला इसे सही साबित करता है। हालांकि लाली मामा नूरजई की मौत सिर्फ एक मिलिटेंट ऑपरेटिव का खत्म होना नहीं है। जैसे-जैसे तालिबान एक नया रास्ता अपना रहा है, भारत के साथ उनका जुड़ाव दक्षिण एशिया में बड़े बदलाव को दिखाता है।













