रूस लगातार परमाणु हमला करने में सक्षम मिसाइलों से यूक्रेन पर सफल हमले करके यूरोप देशों को कड़ा संदेश दे रहा है। इन रूसी मिसाइलों को अमेरिकी और यूरोपीय एयर डिफेंस सिस्टम भी यूक्रेन में रोक नहीं पा रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों परमाणु सबमरीन बेस पर एक भाषण देने जा रहे हैं जिस पर न केवल पूरे यूरोप की बल्कि रूस और अमेरिका की भी नजर होगी। यूरोप के देश अब तक दशकों से अमेरिका के परमाणु प्रतिरोधक ताकत भरोसा करते आए हैं लेकिन अब उनके यहां बहस छिड़ गई है कि क्या उन्हें भी परमाणु बम बनाना चाहिए या नहीं।
यूरोपीय यूनियन की एकमात्र परमाणु ताकत है फ्रांस
माना जा रहा है कि फ्रांस के राष्ट्रपति देश के परमाणु डाक्ट्रिन को व्यापक पैमाने पर अपडेट कर सकते हैं। मैक्रों ने इससे पहले यह प्रस्ताव दिया था कि किस तरह से यूरोपीय यूनियन की एकमात्र परमाणु ताकत फ्रांस यूरोप की सुरक्षा में मदद कर सकता है। मैक्रों ने कहा है कि फ्रांस कुछ देशों के साथ विशेष सहयोग, संयुक्त अभ्यास और साझा सुरक्षा हित को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने अपने एक अन्य बयान में यह भी कहा है कि फ्रांस परमाणु बम से लैस अपने विमानों को यूरोप के अन्य देशों में तैनात करने की संभावना पर चर्चा करने को तैयार है।
फ्रांस के पास दुनिया का चौथा सबसे बड़ा परमाणु हथियारों का जखीरा है। अनुमान के मुताबिक फ्रांस के कुल 290 परमाणु बम हैं। फ्रांस के अलावा ब्रिटेन एकमात्र यूरोपीय देश है जिसके पास परमाणु बम है। ब्रिटेन यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है। वहीं रूस और अमेरिका दोनों दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु ताकते हैं। इनके पास हजारों की संख्या में परमाणु बम हैं। अमेरिका ने एक बार फिर से आश्वासन दिया है कि वह यूरोप को परमाणु सुरक्षा देता रहेगा लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की वजह से यूरोप के देश इस बयान पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
परमाणु बम पर ब्रिटेन और फ्रांस आए साथ
यही वजह है कि ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने भी कहा है कि ब्रिटेन के परमाणु बम अपने साथी नाटो देशों की सुरक्षा करेंगे लेकिन इस बात पर भी जोर दिया है कि वह फ्रांस के साथ परमाणु सहयोग को बढ़ा रहा है। यूरोपीय यूनियन में कुल 27 देश हैं जिसमें कई नाटो का हिस्सा नहीं है। वहीं कई देशों की सीमा रेखा रूस से लगती है जिससे उन्हें खतरा महसूस हो रहा है। वहीं फ्रांस की बात करें तो वह अमेरिका की खाली की गई जगह को भरना चाहता है। इसके अलावा फ्रांस भारत के साथ अपनी सैन्य दोस्ती को मजबूत कर रहा है जिससे उससे हथियारों के विकास के लिए काफी पैसा मिल रहा है। भारत और फ्रांस जल्द ही राफेल फाइटर जेट को लेकर बड़ी डील करने वाले हैं।













