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  • नेपाल में 5 मार्च को चुनाव, भारत के लिए बहुत मायने क्यों रखती है पड़ोस की नई सरकार

    नई दिल्ली: नेपाल में पिछले साल सितंबर में हुई युवाओं की हिंसक क्रांति के बाद 5 मार्च को पहला राष्ट्रीय चुनाव होने जा रहा है। नेपाल में ‘जेन जी’ क्रांति में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की कम्युनिस्ट सरकार को उखाड़ फेंका गया था। इस बार के चुनाव में मुख्य मुकाबला


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    By Azad Hind Desk फरवरी 28, 2026
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    नई दिल्ली: नेपाल में पिछले साल सितंबर में हुई युवाओं की हिंसक क्रांति के बाद 5 मार्च को पहला राष्ट्रीय चुनाव होने जा रहा है। नेपाल में ‘जेन जी’ क्रांति में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की कम्युनिस्ट सरकार को उखाड़ फेंका गया था। इस बार के चुनाव में मुख्य मुकाबला उनके और काठमांडू के पूर्व मेयर और राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी के युवा चेहरे बालेंद्र शाह के बीच है।

    हिंदु बहुल नेपाल का भारत के साथ संबंध दो संप्रभु राष्ट्रों से कहीं ज्यादा है, जिसे दोनों देशों के तराई इलाके के लोग के बेटी-रोटी का रिश्ता बताते नहीं थकते। दोनों देशों के बीच का संबंध लिखित इतिहास से भी पुराना बताया जाता है, जिसकी छवि आज भी खुली सीमाओं में नजर आती है। इसलिए नेपाल से जुड़ा हर अहम विषय भारत को बहुत ही गहराई से प्रभावित करता है।

    नेपाल में कब है राष्ट्रीय चुनाव

    लगभग 3 करोड़ की आबादी वाले नेपाल में 5 मार्च को करीब 1.90 करोड़ मतदाता नई सरकार चुनने के लिए वोट डालेंगे। 275 सदस्यों वाली नेपाल की प्रतिनिधि सभा में 165 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे और बाकी 110 सीटें पार्टियों को उनके वोट शेयर के अनुपात में आवंटित की जाएंगी।

    नेपाल चुनाव का अहम मुद्दा क्या

    हमारे सहयोगी अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स को काठमांडू के कुछ सूत्रों ने जानकारी दी है कि इस बार का चुनाव रोजगार और अर्थव्यवस्था को लेकर ही होने वाला है। पिछले साल सितंबर में ओली सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्साए युवाओं का हुजूम जिस तरह से नेपाली शासन पर नियंत्रण करने में सफल रहा , उसे देखते हुए इन मुद्दों की अहमियत समझी जा सकती है।

    नेपाल और भारत का व्यापार

    भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी है। विश्व बैंक के अनुमानों के अनुसार नेपाल का 63% या 8.6 अरब डॉलर का आयात भारत पर निर्भर है। इसके बाद चीन है, जो काफी पीछे है, जो इसे पाटने की लगातार कोशिश कर रहा है, जिसके लिए नेपाल की सत्ता में कम्युनिस्टों का शासन ज्यादा फायदेमंद होते देखा गया है। नेपाल 13% या 1.8 अरब डॉलर का सामान अपने उत्तरी पड़ोसी (तिब्बत) चीन से मंगवाता है।

    आपसी संबंध नई सरकार पर निर्भर

    न्यूज एजेंसी एएफपी के अनुसार नेपाली पत्रकार सुधीर शर्मा का कहना है कि किसी भी एक पार्टी का बहुमत में आना ‘बहुत मुश्किल’ लग रहा है। उनके अनुसार, ‘नेपाल का भारत या चीन से संबंध इस बात पर निर्भर करेगा किस तरह का गठबंधन सत्ता में आता है।’ हालांकि भारत को लेकर उनका कहना है, ‘कुछ मुद्दे हैं, कुछ समस्याएं हैं, लेकिन आम तौर पर रिश्ते स्थिर ही रहने चाहिए।’

    कम्युनिस्टों का झुकाव चीन की ओर!

    उन्होंने नेपाल की हिंसक क्रांति का जिक्र कर इस बात को ध्यान में रखने पर जोर दिया कि ‘नेपाल में तत्कालीन लेफ्ट की अगुवाई वाली सरकार का भारत के साथ स्वाभाविक संबंध नहीं था और उसे उखाड़ फेंका गया।’

    सत्ता में युवाओं के आने से क्या होगा

    लेकिन, साउथ एशिया एक्सपर्ट माइकल कुगेलमैन के मुताबिक, ‘नेपाल की लीडरशिप, कभी-कभी भले ही ऐसा लगे कि वह किसी एक शक्ति की ओर झुक रही है, लेकिन उसका इरादा भारत और चीन के साथ संतुलित संबंध रखना है।’ ‘इसमें बदलाव की सोचना कठिन है, चाहे नेपाल की राजनीति में युवाओं की बड़ी तादाद आ चुकी हो।’

    क्या कम्युनिस्टों को मिलेंगे युवा वोट

    नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई हिंसक क्रांति का अंजाम देखने के बाद चार बार के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को युवाओं का वोट मिलेगा, यह कहना बहुत मुश्किल है। ऊपर से आंदोलन के बाद नए वोटरों की संख्या लगभग 10 लाख बढ़ी है, जिनमें ज्यादातर युवा ही हैं। नेपाल चुनाव के अन्य दावेदारों में नेपाली कांग्रेस पार्टी के 49 वर्षीय गगन थापा और पूर्व पीएम और पूर्व माओवादी नेता प्रचंड भी हैं, जो किसी न किसी रूप में सत्ता में घुसने की कोशिश जरूर करेंगे।

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