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  • सिजेरियन डिलीवरी के चांसेज कम करने में मदद कर सकते हैं ये 4 उपाय

    आमतौर पर बच्चे को जन्म देने के दो प्रमुख तरीके होते हैं- पहला नॉर्मल (वेजाइनल) डिलीवरी और दूसरा सिजेरियन (सी-सेक्शन)। कई महिलाएं सिजेरियन डिलीवरी से बचना चाहती हैं। ऐसी स्थिति में वे सप्ताह में कम से कम 5 दिन हल्की वॉक करना और लेबर के दौरान किसी भरोसेमंद व्यक्ति का साथ जैसे उपाय अपनाकर सी-सेक्शन


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    By Azad Hind Desk फरवरी 28, 2026
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    आमतौर पर बच्चे को जन्म देने के दो प्रमुख तरीके होते हैं- पहला नॉर्मल (वेजाइनल) डिलीवरी और दूसरा सिजेरियन (सी-सेक्शन)। कई महिलाएं सिजेरियन डिलीवरी से बचना चाहती हैं। ऐसी स्थिति में वे सप्ताह में कम से कम 5 दिन हल्की वॉक करना और लेबर के दौरान किसी भरोसेमंद व्यक्ति का साथ जैसे उपाय अपनाकर सी-सेक्शन की संभावना को कम करने की कोशिश कर सकती हैं। आइए इस लेख में इन उपायों के बारे में और विस्तार से समझते हैं। साथ ही यह भी जानते हैं कि स‍िजेर‍ियन सेक्‍शन आखिर क्या होता है और किन परिस्थितियों में यह वास्तव में जरूरी हो जाता है।

    क्‍या होता है स‍िजेर‍ियन सेक्‍शन ?

    जॉन हॉपकिन्स मेडिसिन के अनुसार,सिजेरियन डिलीवरी या सी-सेक्शन एक सर्जरी है, जिसमें मां के पेट और गर्भाशय में चीरा लगाकर बच्चे को जन्म दिया जाता है। डॉक्टर यह प्रक्रिया तब करते हैं, जब उन्हें लगता है कि यह मां,बच्चे या फ‍िर दोनों के लिए ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।

    what is cesaren delivery
    क्‍या होता है स‍िजेर‍ियन ऑपरेशन

    सी-सेक्‍शन की आवश्‍यकता कब पड़ती है ?

    अगर नॉर्मल ड‍िलीवरी संभव न हो, तो सी-सेक्शन के जरिए सर्जरी करके बच्चे को बाहर निकाला जाता है। कुछ मामलों में सी-सेक्शन पहले से प्लान किया जा सकता है। वहीं, कई बार प्रसव के दौरान अचानक आई दिक्कतों की वजह से भी डॉक्टर्स को सर्जरी करनी पड़ती है।

    क्लीवलैंड क्‍लीन‍िक के अनुसार, नीचे कुछ पर‍िस्थितियों बताई गई हैं, ज‍िनमें सिजेरियन सेक्शन की आवश्यकता पड़ सकती है-

    • जब कोख में एक से अध‍िक श‍िशु हों
    • प्लेसेंटा प्रीविया
    • ट्रांसवर्स लाई
    • ब्रीच पोज‍िशन
    • -ड‍िलीवरी के वक्‍त भ्रूण पर संकट (लेबर के वक्‍त अगर बच्‍चे की हार्टबीट अन‍ियम‍ित हो रही है तब)
    • -प्लेसेंटल एब्रप्शन
    • -सेफेलोपेल्विक डिसप्रोपोर्शन
    • पहले भी हुई हो सी-सेक्‍शन डिलीवरी (हालांकि पहले सी-सेक्शन के बाद नॉर्मल डिलीवरी संभव हो सकती है, लेकिन यह हर महिला के लिए सुरक्षित नहीं होती। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले ऑपरेशन में गर्भाशय पर किस तरह का चीरा लगाया गया था, यह बहुत मायने रखता है। कुछ प्रकार के चीरे में अगली डिलीवरी के दौरान टांके वाली जगह पर दबाव पड़ सकता है और गर्भाशय फटने का खतरा बढ़ सकता है।
    स‍िजेर‍ियन ड‍िलीवरी से बचने के ल‍िए ट‍िप्‍स। सांकेत‍िक तस्‍वीर- freepik

    स‍िजेर‍ियन ड‍िलीवरी से बचने के ल‍िए अपना सकती हैं ये 5 तरीके

    • जर्नल ऑफ मिडवाइफरी एंड वूमेन्स हेल्थ के मुताबिक, प्रेग्नेंसी के दौरान एक्टिव रहें। हफ्ते में कम से कम 5 दिन,रोज करीब 30 मिनट हल्की एक्‍सरसाइज करने की कोशिश करें। जो महिलाएं नियमित रूप से एक्सरसाइज करती हैं, उनमें सिजेरियन डिलीवरी की संभावना कम हो सकती है, तुलना में उन महिलाओं के जो बिल्कुल व्यायाम नहीं करतीं।
    • अगर प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में बच्चा ब्रीच पोजीशन में हो (यानी उसका सिर नीचे की बजाय ऊपर की ओर हो), तो डॉक्टर सामान्य (वेजाइनल) डिलीवरी के लिए बच्चे को सही पोजीशन में लाने की कोशिश कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को एक्सटर्नल वर्जन कहा जाता है।
    • जल्दी अस्पताल जाने की बजाय, तब जाएं जब कॉन्‍ट्रैक्‍शन तेज और नियमित हो जाएं। लेबर की शुरुआती अवस्था में अगर आप घर पर रहती हैं, तो संकुचनों के बीच आराम कर सकती हैं, थोड़ा टहल सकती हैं और अपनी इच्छा अनुसार हल्का खाना-पीना भी कर सकती हैं।
    • लेबर के दौरान अपने साथ किसी भरोसेमंद व्यक्ति को जरूर रखें। चाहें तो आप किसी विशेषज्ञ की मदद ले सकती हैं, जो डिलीवरी के समय आपको सही जानकारी देती है, दर्द को संभालने में मदद करती है और भावनात्मक सहारा भी देती है। वह आपको और आपके साथी, दोनों को सहयोग करती है। अगर कोई विशेषज्ञ उपलब्ध न हो, तो परिवार का कोई सदस्य या करीबी दोस्त भी इस समय आपका सहारा बन सकता है।

    स‍िजेर‍ियन ऑपरेशन टालने में ये उपाय भी कर सकते हैं मदद

    स‍िजेर‍ियन ड‍िलीवरी से बचने में ये तरीके भी कर सकते हैं मदद
    • अमेर‍िकन प्रेग्‍नेंसी एसोस‍िएशन के मुताबिक, लेबर की शुरुआती अवस्था (हल्‍के कॉन्‍ट्रैक्‍शन ) को नैचुरली रूप से आगे बढ़ने देना फायदेमंद हो सकता है
    • जब तक गर्भाशय ग्रीवा का फैलाव 6 सेंटीमीटर (4 सेंटीमीटर के बजाय) होने पर उसे ही एक्‍टि‍व लेबर ( कॉन्‍ट्रैक्‍शन ब‍हुत तेज और समय के साथ बढ़ते जाए) की शुरुआत माना जाए।
    • जिन महिलाओं ने पहले भी बच्चे को जन्म दिया है, उन्हें कम से कम दो घंटे तक पुश करने का समय दिया जाना चाहिए। वहीं, जिनकी यह पहली डिलीवरी है, उन्हें लगभग तीन घंटे तक पुश करने की अनुमति दी जा सकती है। कुछ खास परिस्थितियों में, खासकर एपिड्यूरल लेने पर, इससे भी अधिक समय दिया जा सकता है।

    वर्ल्‍ड हेल्‍थ आर्गनाइजेशन जता चुका है सी-सेक्‍शन के बढ़ते मामलों पर च‍िंता

    वर्ल्‍ड हेल्‍थ आर्गनाइजेशन (WHO) ने सी-सेक्शन के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है। अपनी एक रिपोर्ट में संगठन ने कहा है कि जिन परिस्थितियों में नॉर्मल ड‍िलीवरी मां या शिशु के लिए जोखिम भरा हो सकता है, वहां जीवन बचाने के लिए सिजेरियन सेक्शन बेहद आवश्यक होता है। ऐसे मामलों में समय पर किया गया सी-सेक्शन मां और बच्चे दोनों की जान बचा सकता है। इसलिए सभी स्वास्थ्य प्रणालियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर हर महिला को यह सुविधा समय पर उपलब्ध हो। हालांकि, वर्तमान में किए जा रहे सभी सिजेरियन सेक्शन मेडिकल कारणों से आवश्यक नहीं होते। अनावश्यक सर्जरी मां और शिशु दोनों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकती है।

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