महत्वपूर्ण विवरण
| तिथि: | शुक्ल त्रयोदशी – सायं 07:09 बजे तक |
| योग: | दोपहर 02:33 बजे तक |
| करण: | कौलव – प्रातः 07:54 बजे तक |
| करण: | तैतिल – सायं 07:09 बजे तक |
| करण: | गरज – प्रातः 06:29 बजे तक (2 मार्च) |
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
| सूर्योदय का समय | प्रातः 06:47 बजे |
| सूर्यास्त का समय | सायं 06:20 बजे |
| चंद्रोदय का समय | दोपहर 03:09 बजे |
| चंद्रास्त का समय | प्रातः 05:22 बजे (1 मार्च) |
समस्त नव ग्रहों की की राशियां (प्रात: 06: 00 बजे)
| सूर्य देव | कुंभ राशि में स्थित हैं |
| चन्द्र देव | कर्क राशि में स्थित हैं |
| मंगल देव | कुंभ राशि में स्थित हैं |
| बुध देव | कुंभ राशि में स्थित हैं। |
| गुरु बृहस्पति | मिथुन राशि में स्थित हैं |
| शुक्र देव | कुंभ राशि में स्थित हैं |
| शनि देव | मीन राशि में स्थित हैं |
| राहु | कुंभ राशि में स्थित हैं |
| केतु | सिंह राशि में स्थित हैं |
सूर्य और चंद्रमा की राशियां
| सूर्य देव | कुंभ राशि में स्थित हैं |
| चन्द्र देव | कर्क राशि में स्थित हैं |
आज के शुभ मुहूर्त
| अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 12:10 बजे से दोपहर 12:57 बजे तक |
| अमृत काल | प्रातः 06:18 बजे से प्रातः 07:51 बजे (2 मार्च) तक |
आज के अशुभ समय
| राहुकाल | सायं 04:54 बजे से सायं 06:21 बजे तक |
| गुलिकाल | दोपहर 03:27 बजे से सायं 04:54 बजे तक |
| यमगण्ड | दोपहर 12:34 बजे से 02:00 बजे तक |
आज का नक्षत्र
- आज चंद्रदेव पुष्य नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
- पुष्य नक्षत्र: प्रातः 08:34 बजे तक
- सामान्य विशेषताएं: सहायक, संवेदनशील, आत्मनिर्भर, धैर्यशील, परिश्रमी, शांतचित्त, बुद्धिमान, कर्तव्यनिष्ठ, नियमपालक, धर्मपरायण, उदार और परोपकारी।
- नक्षत्र स्वामी: शनि देव
- राशि स्वामी: चंद्र देव
- देवता: बृहस्पति देव
- प्रतीक: कमल या गाय का थन
- आज रवि प्रदोष व्रत है।
रवि प्रदोष व्रत 2026
| प्रदोष काल समय | शाम 06:21 से रात 08:50 तक |
| त्रयोदशी तिथि प्रारंभ | 28 फरवरी, 2026 को रात 08:43 बजे |
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | 01 मार्च, 2026 को शाम 07:09 बजे |
प्रदोष व्रत प्रत्येक मास की दोनों त्रयोदशी तिथियों को किया जाता है। जब त्रयोदशी तिथि सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में पड़ती है, तब भगवान शिव की पूजा अत्यंत शुभ होती है। रविवार को होने के कारण इसे रवि प्रदोष कहते हैं, जो पितृ दोष से मुक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। सूर्य देव द्वारा शासित होने के कारण यह व्रत कुंडली में सूर्य संबंधी समस्याओं को दूर कर लंबी आयु और आरोग्य प्रदान करता है। इससे भक्तों को पारिवारिक सुख और सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है। यह आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक है।














