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  • ईरान युद्ध पर मोदी सरकार की प्रतिक्रिया, भारत के मूल्यों के साथ विश्वासघात’, विदेश नीति पर भड़की कांग्रेस

    नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट संकट और यूएस-ईरान वॉर के बीच भारत का सियासी पारा भी चढ़ा हुआ है। भारत की विदेश नीति को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। साथ ही ईरान संकट को लेकर भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश


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    By Azad Hind Desk मार्च 1, 2026
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    नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट संकट और यूएस-ईरान वॉर के बीच भारत का सियासी पारा भी चढ़ा हुआ है। भारत की विदेश नीति को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। साथ ही ईरान संकट को लेकर भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘चाहे प्रधानमंत्री और उनकी मंडली कितना भी दिखावा कर लें, हकीकत यह है कि स्वयंभू विश्वगुरु के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।’ उन्होंने कहा, ‘देश को प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की विषयवस्तु और उसके तौर-तरीकों-दोनों की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।’

    कांग्रेस ने सरकार पर छोड़े 6 तीखे तीर

    1. अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान के साथ अपनी नजदीकियां लगातार बनाए हुए हैं और बार-बार उसी व्यक्ति की सराहना कर रहे हैं, जिसके भड़काऊ बयानों ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि तैयार की थी।अमेरिका ने अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान की लड़ाई में साफ तौर पर पाकिस्तान को समर्थन किया है।
    2. अमेरिकी राष्ट्रपति अब तक की गिनती के अनुसार 100 से अधिक बार यह दावा कर चुके हैं कि कि उन्होंने 10 मई 2025 को भारत के निर्यात पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी देकर ऑपरेशन सिंदूर को रुकवाने में हस्तक्षेप किया था। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के इन दावों पर प्रधानमंत्री पूरी तरह मौन हैं।ऑपरेशन सिंदूर को रोकने की पहली घोषणा 10 मई 2025 को शाम 5:37 बजे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने की थी।
    3. 2 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा किया कि प्रधानमंत्री के अनुरोध पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम रूप ले चुका है और तुरंत प्रभाव से लागू हो रहा है। यह स्पष्ट है कि यह पीएम मोदी की एक हताश पहल थी।अठारह दिन बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने घोषणा किया कि राष्ट्रपति ट्रंप की वह टैरिफ रणनीति, जो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बुनियाद थी, अवैध और असंवैधानिक है। यह निर्णय व्यापक रूप से अपेक्षित था, लेकिन पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव डाला कि वे सबसे पहले इसकी घोषणा करें।
    4. यह व्यापार समझौता अब व्यापक रूप से एकतरफा माना जा रहा है, जिसमें भारत ने विशेष रूप से कृषि उत्पादों के आयात को उल्लेखनीय रूप से उदार बनाने के ठोस वादे किए हैं, जबकि इसके बदले में अमेरिका की ओर से भारत से आयात बढ़ाने का कोई समान वचन नहीं दिया गया है।अमेरिका ने बार-बार यह भी जोर देकर कहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है, लेकिन इस संबंध में किए गए वादे पर मोदी सरकार ने कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
    5. प्रधानमंत्री मोदी ने 25-26 फरवरी 2026 को इजराइल का दौरा ऐसे समय में किया, जब पूरी दुनिया को यह जानकारी थी कि शासन परिवर्तन के उद्देश्य से ईरान पर अमेरिका-इजराइल का सैन्य हमला आसन्न है। पीएम मोदी के इजराइल से रवाना होने के केवल दो दिन बाद ही यह हमला शुरू हो गया। वहां नेसेट में दिया गया उनका भाषण नैतिक कायरता का शर्मनाक प्रदर्शन था। ईरान पर थोपे गए इस युद्ध के प्रति मोदी सरकार की प्रतिक्रिया भारत के मूल्यों, सिद्धांतों, चिंताओं और हितों के साथ विश्वासघात है।
    6. पीएम मोदी ने 19 जून 2020 को सार्वजनिक रूप से चीन को क्लीन चिट दे दी थी। यह चौंकाने वाला बयान उस समय आया, जब लद्दाख सीमा पर हमारे 20 बहादुर जवान शहीद हुए थे।इस क्लीन चिट ने हमारी बातचीत की स्थिति को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया और अब हमें चीन की शर्तों पर संबंधों को सामान्य बनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
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