पाकिस्तान में नाकाम हुआ चीनी HQ-9
चीनी हथियारों की हाल में सबसे पहली परीक्षा मई में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई थी। पाकिस्तान को चीनी हथियारों पर बड़ा भरोसा था, लेकिन भारतीय वायु सेना की ब्रह्मोस मिसाइलों के सामने ये फुस्स साबित हुए। पाकिस्तानी सेना बेबस देखती रही और भारतीय मिसाइलों ने YLC-8E एंटी स्टील्थ रडार और HQ-9 बैटरी को खत्म कर दिया। यही हाल चीनी एयर डिफेंस सिस्टम का वेनेजुएला में हुआ, जब अमेरिकी सेना ने इन्हें HQ-9 और HQ-9B को अंधा कर दिया।
भारत ने चीनी डिफेंस की निकाली हवा
पहलगाम में आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर किया। भारतीय वायु सेना ने बिना LoC पार किए बिना मिसाइलों और हवा से लॉन्च होने वाले हथियारों का इस्तेमाल करके पाकिस्तान में आतंकी कैंपों के साथ ही 9 मिलिट्री ठिकानों को भी निशाना बनाया। इन सैन्य अड्डों में चुनियन बेस भी था, जहां पाकिस्तान ने चीन में निर्मित YLC-8E एंटी स्टील्थ रडार लगाया।
चीन ने इस रडार की डिटेक्शन रेंज 450 किमी होने का दावा किया है लेकिन भारतीय वायु सेना के ग्रीन पाइन रडार और ग्रोलर जैसे इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ने इसे जाम कर दिया। रडार होने के बावजूद भारतीय मिसाइलें पाकिस्तानी एयरबेस पर तबाही मचाने में कामयाब रहीं। इसी तरह लाहौर में चीनी HQ-9 SAM भारतीय हमला रोकने में नाकाम रहा। इतना ही नहीं पाकिस्तानी एयर फोर्स के चीनी JF-17 फाइटर से दागी गई PL-15E एयर-टू-एयर मिसाइल लक्ष्य पर जाने से चूक गई और भारत ने उसे सही सलामत बरामद कर दिया। इसके रॉकेट मोटर और गाइडेंस सिस्टम में कमियां पाई गईं।
वेनेजुएला में चीनी हथियारों की खुली पोल
3 जनवरी को अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व शुरू किया, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को मिलिट्री घेरे से उठा लिया गया। वेनेजुएला ने चीनी रक्षा कवच पर भरोसा किया था, लेकिन अमेरिकी हथियारों के सामने यह यह ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। वेनेजुएला के एयर डिफेंस की रीढ़ कहे जाने वाले चीनी JY-27A मीटर वेव एंटी स्टील्थ रडार अंधे हो गए। HQ-9 SAMs और HQ-12 तो म्यूट रहे और उनके इल्यूमिनेटर लॉक ही नहीं हो सके।
ईरान में चीनी सिस्टम ने कर दिया सरेंडर
चीनी हथियारों की कमजोरी की रही-सही कसर ईरान पर अमेरिका और इजरायल के ताजा हमलों ने पूरी कर दी। जून 2025 में इजरायली हमले के दौरान रूसी S-300 के नाकाम होने के बाद इसने चीन से HQ-9B SAM डिफेंस सिस्टम खरीदा था। चीन ने इस हथियार पर 260 किमी की रेंज का वादा किया था, लेकिन असली युद्ध के दौरान इसने अमेरिकी और इजरायली हथियारों के सामने सरेंडर कर दिया और एक भी इंटरसेप्ट नहीं कर सका।
इसका रडार सिस्टम इतना बेकार निकला कि अमेरिका निर्मित F-35 स्टील्थ फाइटर बिना पता चले 50 नॉटिकल मील के अंदर पहुंच गए। खराब सिस्टम इंटीग्रेशन बड़ी कमी के रूप में सामने आया। ईरान के कमांड सेटर्स में NATO की तरह स्मूद डेटा लिंकिंग की कमी थी। इसके चलते इसके रडार धीमा हो गया और F-35 के एडवांस रडार ने दुश्मन के टारगेट को लॉक करते 6 बैटरी नष्ट कर दी।
क्यों फेल हो रहे चीनी हथियार?
चीन दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है। हालांकि, हालिया नाकामियों के बाद यह भरोसे के संकट का सामना कर रहा है। चीनी हथियारों में अमेरिका या रूसी हथियारों जैसे कड़े ट्रायल की कमी होती है। HQ-9 के रडार की कमजोरियां उन्हें जैमिंग और एंटी-रेडिएशन मिसाइलों के लिए आसान टारगेट बनाती हैं। खराब इंटीग्रेशन मल्टी-लेयर डिफेंस में बड़ी रुकावट बनता है, जैसा कि तीनों मामलों में देखा गया है।













