18 फरवरी की दोपहर 2:40 बजे, अनरूप गुप्ता द्वारका सेक्टर 14 स्थित राधिका अपार्टमेंट्स में अपने आवास से अपनी कार से सेक्टर 13 में छत्तीसगढ़ सदन में स्थित अपनी कैंटीन के लिए निकले। कई घंटों बाद, रात 9:40 बजे, उन्होंने कथित तौर पर एक दोस्त को वॉइस नोट भेजा, जिसमें उन्होंने उसे कैंटीन आने के लिए कहा। गुप्ता के पहले के मैसेज हिंदी में थे, लेकिन वॉइस नोट के बाद मिली प्रतिक्रिया केवल शॉर्ट ओके तक सीमित थी।
घरवालों को हुआ शक
इसके चार दिन बाद, 22 फरवरी को दोपहर करीब 3.12 बजे, अनरूप के सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट शेयर की गई, जिसमें कथिर तौर पर उन्हें गोवा में दिखाया गया था। लेकिन परिवार और दोस्तों ने फोटो में चेहरे पर उनका पुराना तिल देखकर शक जताया, जिसे वह पहले ही हटवा चुके थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने कैसे किया खुलासा
- पुलिस ने तत्काल प्रभाव से मामले की जांच शुरू कर NHAI का डेटा खंगाला तो पता चला कि गुप्ता की कार आखिरी बार 19 और 20 फरवरी की दरमियानी रात को एक्सप्रेसवे पर देखी गई थी। टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि कार वृंदावन की ओर गई थी और कुछ घंटों बाद नोएडा की ओर वापस लौट रही थी।
- इसी बीच, दिल्ली पुलिस ने छत्तीसगढ़ सदन के सीसीटीवी फुटेज की जांच की और पाया कि गुप्ता बाइक टैक्सी ले रहे थे। तकनीकी जांच और सीडीआर विश्लेषण से पुलिस को बाइक चालक का पता लगाने में मदद मिली, जिसने पुष्टि की कि कारोबारी ने सदन में अपनी कार छोड़ने के बाद वास्तव में बाइक टैक्सी से मटियाला एक्सटेंशन स्थित एक घर तक गए थे।
- सीसीटीवी में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि गुप्ता एक इमारत में प्रवेश कर रहे हैं। हालांकि, उन्हें बाहर आते नहीं देखा गया। उनके बाद चार अन्य लोग भी इमारत में दाखिल हुए। बाद में उन्हें स्कूटर का इस्तेमाल करते देखा गया।
- जांचकर्ताओं ने और फुटेज खंगाला और 19 फरवरी को गुप्ता की कार को मटियाला इमारत के तहखाने में प्रवेश करते देखा। बाद में उन्होंने पता लगाया कि उन्होंने अपने दोस्त हैप्पी (29) और अपने चार साथियों को बताया था कि उनकी सोने की अंगूठियां और कंगन कार के अंदर हैं, जो सदन में खड़ी थी।
- कथित तौर पर पांचों ने उन्हें चाबी सौंपने के लिए मजबूर किया, कार को मटियाला ले गए, गहने निकाले और फ्लैट लौट आए। इसके बाद कार को वृंदावन की ओर से ले जाकर सबूत छिपाने की कोशिश की गई।
- स्कूटर की जानकारी होने पर पुलिस ने मालिकाना हक की जानकारी प्राप्त की और पता चला कि यह स्कूटर हरिणाया के निवासी हैप्पी के नाम पर रजिस्टर्ड है। यहीं से मामला सुलझने लगा। पुलिस ने हैप्पी को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसने खुलासा किया कि उसने भूपेंद्र, बलराम, नीरज और राखी के साथ मिलकर गुप्ता की हत्या की थी।
किसने की कारोबारी अनरूप गुप्ता की हत्या
पुलिस ने भूपेंद्र की पहचान हरियाणा के सोनीपत जिले के निवासी 27 वर्षीय युवक के रूप में, राखी की पहचान उत्तर प्रदेश के देवरिया की निवासी हैप्पी की 21 वर्षीय लिव-इन पार्टनर के रूप में और बलराम की पहचान हरियाणा के झज्जर निवासी 28 वर्षीय युवक के रूप में की। इनमें से किसी का भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
भूपेंद्र को इंद्रलोक से, राखी को हरियाणा के हांसी से और बलराम को झज्जर से गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल नीरज फरार है। बिंदापुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।














