• National
  • ईरान के निशाने पर हर वो देश जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने, गलत साबित हो रहा ट्रंप का कैलकुलेशन

    सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको की रास तनुरा फैसिलिटी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी में से एक है। सोमवार को इसका भी हमले की जद में आ जाना उस आशंका की आहट है, जिसका डर अमेरिका-इस्राइल के ईरान पर संयुक्त हमला करने के साथ ही सताने लगा था। यह लड़ाई अब अनियंत्रित ही


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk मार्च 3, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको की रास तनुरा फैसिलिटी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी में से एक है। सोमवार को इसका भी हमले की जद में आ जाना उस आशंका की आहट है, जिसका डर अमेरिका-इस्राइल के ईरान पर संयुक्त हमला करने के साथ ही सताने लगा था। यह लड़ाई अब अनियंत्रित ही नहीं हो रही, इसने ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर असर दिखाना शुरू कर दिया है।

    अरामको पर हमला

    तेहरान रणनीतिक ढंग से जगहों को निशाना बना रहा है, जिसका असर व्यापक होगा। अरामको पर हमला इसी रणनीति का हिस्सा है। सऊदी क्रूड ऑयल के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण निर्यात टर्मिनल है। लगभग 5.5 लाख बैरल क्रूड ऑयल हर दिन यहां से भेजा जाता है, जो अब बंद करना पड़ा है। ग्लोबल ऑयल सप्लाई के प्रमुख रास्ते होर्मुज स्ट्रेट पर भी तनाव है। इस समुद्री रास्ते से होकर दुनिया का लगभग 20% तेल और इतनी ही गैस का ट्रांसपोर्ट होता है। इराक, बहरीन, कतर और कुवैत इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। होर्मुज और ओमान की खाड़ी में तेल टैंकरों पर हमले हुए हैं।

    भारत के लिए चिंता

    इस तनाव का असर मार्केट पर दिख रहा है। इंटरनेशनल स्टैंडर्ड ब्रेंट के दाम एक ही दिन में 7.7% बढ़कर 78.46 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए। वहीं, Goldman Sachs का अनुमान है कि अगर होर्मुज से व्यापार में एक महीने तक बाधा बनी रही, तो यूरोप में नैचुरल गैस के दाम 130% तक बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है, जिसकी 88% तेल जरूरत आयात से पूरी होती है।

    फैल गया संघर्ष

    ईरान को लेकर अमेरिका के अभी तक के केलकुलेशन गलत साबित होते दिख रहे हैं। अगर वाइट हाउस को थोड़ी भी उम्मीद रही होगी कि अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नहीं रहने पर तेहरान झुक जाएगा, तो उसका जवाब अब मिल चुका है। ईरान की जवाबी कार्रवाई अब ज्यादा आक्रामक है और बहरीन, कुवैत, UAE से लेकर इलाके का हर वह देश उसके निशाने पर है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं।

    घटती उम्मीद

    यह संघर्ष धीरे-धीरे पूरे पश्चिम एशिया का बनता जा रहा है। हिजबुल्लाह ने भी इस्राइल पर मिसाइल दागी हैं और बदले में इस्राइल ने लेबनान पर स्ट्राइक की है। जिस तरह से लड़ाई नए क्षेत्रों में फैल रही है, इसकी जटिलता भी बढ़ती जा रही है। समझौते का फिलहाल कोई रास्ता नहीं दिख रहा। भारत के लिए चिंता अपनी ऊर्जा जरूरत को पूरा करना तो है ही, मिडल ईस्ट में फंसे लाखों भारतीय भी हैं। युद्ध लंबा चला तो भारतीय अर्थव्यवस्था को इससे नुकसान होगा। इसी वजह से सोमवार को भारतीय शेयर बाजार भारी दबाव में दिखे।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।