Ctvnews की एक रिपोर्ट (REF.) के अनुसार, एक पोस्ट काफी शेयर हो रही है जिसमें इस्राइली न्यूक्लियर फैसिलिटी के बर्बाद होने की बात कही जा रही है। असल में वह 2017 का यूक्रेन का फुटेज है। एक वीडियाे में ईरानी प्लेन के खत्म होने का दावा किया जा रहा है, जो असल में एक वीडियो गेम का फुटेज है। इसी तरह से, तेल अवीव पर एक स्ट्राइक का वीडियाे साझा किया जा रहा है जो असल में चीन में केमिकल वेयरहाउस में हुए ब्लास्ट का वीडियो है और साल 2015 का है।
पुराने वीडियोज को युद्ध का बताया जा रहा
रिपोर्टों के अनुसार, सोशल मीडिया खासकर एक्स (X) पर कई पुराने वीडियोज शेयर करके उन्हें युद्ध से जोड़ा जा रहा है। कुछ वीडियोज वेरिफाइड अकाउंट्स से शेयर किए जा रहे हैं, जिन्होंने लोगों को कन्फ्यूजन में डाला है। अमेरिका में AFP की हेड ऑफ डिजिटल इनेवेस्टिगेशंस की हेड मारीशा गोल्डहैमर ने कहा कि सोशल मीडिया में शेयर होने वाले ऐसे वीडियोज जब पॉपुलर हो जाते हैं तो लोगों को लगता है कि उन्हें अटेंशन मिल रही है। उन्हें यह चिंता नहीं रहती कि वह सच बता रहे हैं या नहीं।
कम्युनिटी नोट्स कर रहे मदद
एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कम्युनिटी नोट्स लोगों की मदद कर रहे हैं। ये उन तमाम वीडियोज पर नोट लगाते हैं जो पुराने हैं या गलत जानकारी दे रहे हैं। हालांकि हर बार ऐसा हो जरूरी नहीं। कुछ वीडियोज नजरों से बच जाते हैं और लोगों को भ्रमित करते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि संवेदनशील मामलों में लोगों को थोड़ा सतर्क रहना चाहिए। उन्हें वीडियोज को वेरिफाई करके शेयर करना चाहिए। जरा भी शक किसी वीडियो पर लगे तो उसे शेयर नहीं करना चाहिए।
AI वीडियो पहचानना नहीं है कठिन
ऐसा नहीं है कि एआई वीडियोज को पहचाना नहीं जा सकता। बहुत से वीडियोज तुरंत पहचान में आ जाते हैं। ऐसे ही एक वीडियो में जिसे लेकर दावा है कि ईरान ने दुबई पर अपने फाइटर जेट्स की मदद से हमला किया है, उस वीडियो में एक आदमी का हाथ बहुत बिगड़ा है, उसमें ढेर सारी उंगलियां दिख रही हैं। इस तरह की छोटी-छोटी बातों पर गौर करके लोग खुद भी एआई वीडियो की पहचान कर सकते हैं।














