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  • क्या अयातुल्ला अली खामेनेई भारत के दोस्त थे, मोदी सरकार पर क्यों लग रहे ईरान को अकेला छोड़ने के आरोप?

    तेहरान: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत सरकार के रुख की विपक्षी दलों ने आलोचना की है। सोनिया गांधी ने अमेरिकी-इजरायली हमले में खामेनेई की हत्या पर सरकार की चुप्पी को भारत की “विरासत” को “छोड़ना” बताया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या खामेनेई सचमुच भारत के दोस्त


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    By Azad Hind Desk मार्च 3, 2026
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    तेहरान: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत सरकार के रुख की विपक्षी दलों ने आलोचना की है। सोनिया गांधी ने अमेरिकी-इजरायली हमले में खामेनेई की हत्या पर सरकार की चुप्पी को भारत की “विरासत” को “छोड़ना” बताया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या खामेनेई सचमुच भारत के दोस्त थे। हालांकि, इतिहास उन्हें इस नजर से नहीं देखता है। खामेनेई ने कई मौकों पर भारत के खिलाफ बयानबाजियां की थी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में भारत सरकार का रुख जियोपॉलिटिकल रणनीति से प्रभावित है, जिसमें देश हित सबसे पहले आता है।

    भारत के खिलाफ बोलते रहे हैं खामेनेई

    इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने मुस्लिम दुनिया से ‘कश्मीर के दबे-कुचले मुसलमानों’ के लिए समर्थन की अपील की थी। 2020 में सिटिजनशिफ अमेडमेंट एक्ट (CAA) पर हुए दंगों के बाद, खामेनेई ने फिर से भारत के अंदरूनी मामलों में दखल दिया। उन्होंने दंगों को मुसलमानों का कत्लेआम बताया और भारत को इस्लाम की दुनिया से अलग-थलग करने की धमकी दी। खामेनेई ने एक्स पर लिखे अपने पोस्ट में ‘इंडियन मुस्लिम्स इन डेंजर’ हैशटैग का इस्तेमाल किया था। उन्होंने हिंदुओं को कट्टरपंथी बताया था और उनका सामना करने की अपील की थी।

    भारत ने की थी खामेनेई के बयानों की आलोचना

    खामेनेई ने 2019 में जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने पर भारत की आलोचना की थी। उन्होंने भारत से कश्मीर पर “सही पॉलिसी” अपनाने की मांग की थी। इस पर नाराजगी जताने के लिए भारत ने ईरानी राजदूत को तलब किया था। सितंबर 2024 में खामेनेई ने एक ट्वीट में भारत को म्यांमार और गाजा के साथ रखा। इसकी भी भारत ने कड़ी निंदा की थी और अज्ञानता करार दिया था।

    ईरान को छोड़ भारत अपने हित को साध रहा

    भारत ईरान के पक्ष में न बोलकर सीधे अपने राष्ट्रीय हितों को साध रहा है। मध्य पूर्व के देशों में भारत की एक बड़ी आबादी रहती है। इनकी संख्या 90 लाख से ज्यादा है। मध्य पूर्व के कई देश भारत के स्ट्रैटजिक पार्टनर भी हैं। ये देश व्यापारिक रूप से भी भारत के लिए ईरान की अपेक्षा ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। इस कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दो दिनों में कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात की है, जिसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कतर, कुवैत, ओमान और कतर जैसे देश शामिल हैं। ईरान ने इन सभी देशों पर हमले किए हैं, जिनसे बड़े पैमाने पर तबाही मची है।

    ईरान के साथ मुस्लिम देश भी नहीं

    अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मुस्लिम देशों से भी मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के 57 सदस्य देशों में से 10 से भी कम ने खुले तौर पर शोक जताया। रूस, चीन, नॉर्थ कोरिया और पाकिस्तान, इराक, मलेशिया और तुर्की जैसे कई इस्लामिक देशों ने हमलों की निंदा की है और दुख जताया है।

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