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  • मुस्लिम उम्माह का ‘गद्दार’ बनने का खतरा या ईरान के रौद्र रूप का डर? सऊदी, UAE क्‍यों नहीं कर रहे तेहरान पर जवाबी हमला

    रियाद: इजरायल और अमेरिका ने शनिवार को ईरान पर हवाई हमले शुरू कर दिए। इसके तुरंत बाद ईरान ने जवाबी अटैक करते हुए ना सिर्फ इजरायल बल्कि बहरीन, कतर, कुवैत, ओमान, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों को भी निशाना बनाया। ईरान ने इन देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया


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    By Azad Hind Desk मार्च 3, 2026
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    रियाद: इजरायल और अमेरिका ने शनिवार को ईरान पर हवाई हमले शुरू कर दिए। इसके तुरंत बाद ईरान ने जवाबी अटैक करते हुए ना सिर्फ इजरायल बल्कि बहरीन, कतर, कुवैत, ओमान, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों को भी निशाना बनाया। ईरान ने इन देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया है। ईरान के हमलों से इन देशों में हलचल है क्योंकि इनकी पहचान मिडिल ईस्ट में स्थिरत मुल्कों की है। अपनी इस इमेज को नुकसान के बावजूद ये देश हमलों पर चुप्पी साधे हुए हैं।

    ईरान का दावा अमेरिकी बेस को निशाने बनाने का है लेकिन कई रिपोर्ट बताती हैं कि दुबई, अबू धाबी और दूसरे शहरों में होटलों और रिहायशी इलाकों पर हमले हुए हैं। ईरान के हमलों के बावजूद अरब देशों ने संयम दिखाया है। ऐसे में पूछा जा रहा है कि अरब देशों के तेहरान पर जवाबी हमला ना करने की क्या वजह हो सकती है।

    अरब देशों का असमंजस

    ईरान के हमलों के बाद अरब देशों के सामने एक मुश्किल चुनाव है। वे ईरान पर जवाबी हमला करते हैं तो यह उनका इस्लामिक समुदाय के खिलाफ जाना माना जाएगा। खामेनेई की हत्या के बाद दुनियाभर के मुस्लिमों में जो गुस्सा है, उसे देखते हुए कोई भी अरब देश इजरायल के साथ खड़े दिखने का जोखिम नहीं लेगा।

    सऊदी अरब और ईरान के बीच लंबे समय से तनातनी रही है। ईरान के हमलों से देश की सरकारी अरामको रिफाइनरी में धमाका हुआ है। इसके बावजूद रियाद ने अब तक बहुत सावधानी बरती है। सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने रॉयल सऊदी आर्म्ड फोर्स से बात की है और ईरान को चेतावनी दी है।

    मुस्लिम उम्माह के खिलाफ दिखने का डर

    अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि ईरान के हमले में आने के बाद कई अरब देश अब मिलिट्री हमले में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि ऐसा होना मुश्किल लगता है। एक्सपर्ट इसे ट्रंप की ओर से छोड़ा गया शिगूफा मान रहे हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि ईरान के खिलाफ संयम का एक अहम कारण मुस्लिम उम्माह का कॉन्सेप्ट है।

    मुस्लिम उम्माह से मतलब दुनियाभर के मुस्लिम बाहुल्य देशों की एकता से है। इस शब्द का मुस्लिम मुल्कों में अक्सर इस्तेमाल होता है और आम मुस्लिम तक में इसका जिक्र किया जाता है। ईरान ने लगातार इजरायल और अमेरिका को एक चुनौती पेश की है। इसके चलते शिया देश होने के बावजूद दुनिया के मुस्लिमों के बीच उसकी अच्छी छवि बनी है।

    ईरान का हमले और तेज करने का डर

    ईरान की इजरायल से टकराने की छवि ने शिया-सुन्नी के फर्क को मिटा दिया है। सुन्नी मुल्कों में स्पष्ट रूप से ईरान के लिए सहानुभूति देखी जा सकती है। ऐसे में कोई भी इस्लामिक देश यह नहीं चाहेगा कि उसकी ईरान से लड़ाई को मुस्लिम उम्माह की ताकत को कम करने वाले ‘गद्दार’ की तरह से देखा जाए।

    इस बात का कोई ऑफिशियल कारण नहीं है कि अरब देश ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं। हालांकि इसे सिर्फ मुस्लिम जगत की नाराजगी से नहीं जोड़ा जा सकता है। इन देशों को यह भी डर है कि अगर उन्होंने जवाबी हमला किया तो ईरान और ज्यादा आक्रामक तरीके से हमले कर सकता है। ऐसे में चुप रहकर चीजों को शांत किया जाए।

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