स्वराज्यमग की रिपोर्ट कहती है कि यूएई के साथ भारत की एकजुटता और अयातुल्ला खामेनेई की हत्या पर चुप्पी नया डिप्लोमैटिक रुख नहीं है। यह बारह साल में बन रही फॉरेन पॉलिसी डॉक्ट्रिन का पहला साफ पब्लिक खुलासा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का UAE पर ईरानी हमलों की कड़ी निंदा करना और प्रेसिडेंट अल नाहयान को भाई कहना इंडियन ओशन रीजन (IOR) की एक सटीक और नई फॉरेन पॉलिसी डॉक्ट्रिन का खुलासा है।
भारत का नया सिद्धांत क्या है
रिपोर्ट कहती है कि भारत के 12 साल में बनने वाले इस सिद्धांत की शुरुआती परिभाषा इस तरह हो सकती है कि भारत अपनी आर्थिक और मिलिट्री ताकत के साथ इस इलाके में नए गठबंधनों का इस्तेमाल करेगा। इसके लिए भारत और उसके सहयोगियों के हितों की रक्षा की जाएगी। वह ऐसा अपने सहयोगियों की सहमति से IOR के लिए नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर बनकर करेगा। यह नीति पहले से बिल्कुल अलग है, जहां मिडिल ईस्ट में शांति का ‘इंश्योरेंस’ सिर्फ अमेरिका के पास था।
भारत पश्चिम एशिया के साथ कापी ज्यादा नजदीकी रखता है। किसी दूसरे बड़े की ऐसी नजदीकी नहीं है। दोनों कई लेवल पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। भारत का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट बनने की तरफ बढ़ना पश्चिम एशिया के अपने लंबे समय के प्लान को पूरी तरह से पूरा करता है, ताकि रेवेन्यू के लिए हाइड्रोकार्बन पर पूरी तरह से निर्भरता से आसानी से छुटकारा पाया जा सके।
पश्चिम एशिया में भारत और चीन
भारत के अलावा चीन के हित क्षेत्र में हैं। खासतौर से ईरान युद्ध से तेल की कीमतों पर होने वाला असर उसे प्रभावित करेगा। चीन को यह पसंद नहीं आएगा क्योंकि वह इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के लिए IOR पर काफी निर्भर है। इसमें कोई शक नहीं है कि वह भारत की नई डॉक्ट्रिन को फेल करने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल करेगा। साफ है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में काफी कुछ खींचतान देखने को मिलेगी।













