इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘पीएम मोदी के इजरायल दौरे के दौरान यह पता नहीं था कि तेहरान पर स्ट्राइक की जाएगी। यह एक ऑपरेशनल मौका था, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाने के बाद ही सामने आया। ईरान पर सैन्य कार्रवाई का मौका आया तो एक सफल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया।’
पीएम मोदी के दौरे के बाद ईरान पर हमला
अजार ने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी के इजरायल से वापस भारत के दो दिन बाद ईरान पर हमला करने का फैसला लिया गया। शनिवार सुबह ही इस हमले के लिए सिक्योरिटी कैबिनेट से मंजूरी मिली। इसके बाद किए गए अमेरिका और इजरायल के साझा अटैक में तेहरान में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई बड़े नेताओं की मौत हो गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 और 26 फरवरी को दो दिन के आधिकारिक दौरे पर इजरायल गए थे। इस दौरे पर पीएम मोदी का भाषण और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ उनकी मुलाकात काफी चर्चा में रही। इस दौरान दोनों देशों के बीच 17 समझौतों पर साइन हुए। उनके इस दौरे के ठीक बाद 28 फरवरी को ईरान में युद्ध शुरू हो गया।
ईरान से इजरायल को खतरा: अजार
रूवेन अजार ने ईरान पर हमले को जायज करार देते हुए कहा कि इजरायल लंबे समय से ईरान से खतरे का सामना कर रहा है। इससे निपटने के लिए इजरायल ने ईरान में अपना इंटेलिजेंस नेटवर्क मजबूत किया। हमने ये जाना कि ईरान की मिसाइल क्षमताएं और हथियारों का जखीरा पूरे क्षेत्र के लिए खतरा है और उसे खत्म करना जरूरी है।
इजरायल और अमेरिका के ईरान पर शनिवार सुबह किए गए हमले से पूरे क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। ईरान ने कई अरब देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है। कई देशों के एयरस्पेस बंद होने से पूरी दुनिया में इसका असर देखा जा रहा है।













