है।
आखिर क्या है यह पूरा मामला
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और IT नियम, 2021 के तहत तय ‘ड्यू डिलिजेंस’ दायित्वों का पालन न करने पर भारत में X के मुख्य अनुपालन अधिकारी को नोटिस जारी किया है। शुक्रवार को जारी निर्देश में X को ऐसे सभी कंटेंट को बिना देरी के हटाने को कहा है। मंत्रालय ने अमेरिका की इस कंपनी को आदेश जारी होने की तारीख से 72 घंटे में विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report-ATR) प्रस्तुत करने को कहा है।
क्या कहता है कानून
भारत के मौजूदा कानून के मुताबिक AI से बनी अश्लील तस्वीरों पर सख्त कानूनी प्रावधान हैं। ऐसे मामलों में न सिर्फ कंटेंट बनाने और साझा करने वाला व्यक्ति दोषी माना जाता है, बल्कि संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और AI टूल चलाने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। कानून के जानकारों के मुताबिक, चाहे तस्वीर असली हो या AI/डीपफेक तकनीक से बनाई गई हो, अगर वह महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली है तो वह गंभीर अपराध की कैटिगरी में आती है।
एक्सपर्ट बोले- भारतीय कानून मानना ज़रूरी
सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट विराग गुप्ता बताते है कि कंपनियों को आईटी कानून की धारा 79 के तहत कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। X, मेटा और गूगल जैसी कंपनिया अमेरिका में रजिस्टर्ड है फिर भी भारत के IT इंटरमीडिएरी नियम 2021 के तहत भारत के कानून का पालन करना जरूरी है। उसके अनुसार एक्स को आपत्तिजनक कंटेंट हटाना ही होगा।
AI कंपनियों पर भी सोशल मीडिया वाले नियम
कानूनी जानकार बताते हैं कि ग्रोक को नोटिस से साफ है कि AI कंपनियों को भी इंटरमीडिएरी नियमों (जो सोशल मीडिया पर लागू है) का पालन करना जरूरी होगा। नोटिस के अनुसार, अगर 72 घंटे में x कार्रवाई नहीं करता तो उसे मिली कानूनी सुरक्षा खत्म हो सकती है। कानूनी सुरक्षा खत्म होने के बाद एक्स के खिलाफ आईटी एक्ट, बीएनएस और पोक्सो समेत दुसरे अन्य कानूनों के उल्लंघन के मामले में राज्यों की पुलिस FIR दर्ज कर सकती है।
आईटी एक्ट 2000 है काफी सख्त
IT ऐक्ट 2000 के तहत अश्लील कंटेंट ऑनलाइन प्रकाशित, प्रसारित या शेयर करना अपराध है। जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान है। IT नियम, 2021 के तहत प्लेटफॉर्म को ऐसे कंटेंट हटाने और दुरुपयोग रोकने के तकनीकी सुरक्षा उपाय अपनाने जरूरी है।
महिलाओं का सम्मान, निजता का अधिकार
महिलाओं की नकली अश्लील तस्वीरें या वीडियो बनाना उनके सम्मान, निजता और सुरक्षा का सीधा उल्लघन माना जाता है। नए आपराधिक कानूनों के तहत इसे यौन उत्पीड़न और साइबर अपराध के रूप में देखा जाता है, जिसमें कड़ी सजा का प्रावधान है।













