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  • AI जेनरेटेड याचिका, अस्तित्वहीन केसों का संदर्भ, CJI का वकीलों को फटकार- यह बिल्कुल गलत है

    नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के गलत इस्तेमाल से सुप्रीम कोर्ट भी परेशान हो चुका है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों द्वारा एआई से ड्राफ्ट की गई याचिकाओं का जिक्र किया, जिसमें ऐसे फैसलों का संदर्भ दिया गया था, जो कभी दिए ही नहीं गए यानी कि


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    By Azad Hind Desk फरवरी 17, 2026
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    नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के गलत इस्तेमाल से सुप्रीम कोर्ट भी परेशान हो चुका है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों द्वारा एआई से ड्राफ्ट की गई याचिकाओं का जिक्र किया, जिसमें ऐसे फैसलों का संदर्भ दिया गया था, जो कभी दिए ही नहीं गए यानी कि फर्जी संदर्भ। सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा उठा भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच में उठा है, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस बी वी नागरत्ना भी शामिल हैं।

    एआई से तैयार याचिकाओं से सुप्रीम कोर्ट परेशान

    लाइवलॉ की रिपोर्ट के मुताबिक सीजेआई सूर्यकांत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार याचिकाओं और उसमें शामिल अदालतों के फर्जी फैसलों के संदर्भों को लेकर कहा, ‘हम यह सोचकर परेशान हैं कि कुछ वकीलों ने एआई से ड्राफ्ट करना शुरू कर दिया है। यह बहुत ही गलत है।’ इसपर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि उन्हें हाल ही में एक ‘मर्सी बनाम मैनकाइंड’ फैसले का संदर्भ मिला, जो कभी था ही नहीं।

    सुप्रीम कोर्ट के कई जजों के साथ हो चुकी है घटना

    इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि ऐसी ही एक घटना जस्टिस दीपांकर दत्ता के कोर्ट में भी हुई। सीजेआई ने कहा कि ‘एक नहीं कई ऐसे फैसलों का हवाला दिया गया।’ सुप्रीम कोर्ट में इसपर जस्टिस नागरत्ना ने एक और केस का जिक्र किया, जिसमें फैसले का संदर्भ सही होगा, लेकिन उस फैसले को लेकर जो ‘कोट’ दिए गए वह फर्जी थे। उन्होंने कहा कि इससे जजों पर एक अतिरिक्त भार पड़ गया है।

    वकीलों की याचिकाओं की गुणवत्ता में बड़ी गिरावट

    पिछले हफ्ते भी जस्टिस नागरत्ना ने एक ऐसे ही फर्जी कोटेशन के मामले में चिंता जताई थी। इसपर जस्टिस बागची ने चिंता जताई कि आजकल लीगल ड्राफ्टिंग की कला को बहुत नुकसान पहुंचा है। उन्होंने इसके लिए स्पेशल लीव पिटीशन का हवाला दिया, जो पुराने फैसलों के कोटेशनों से भरे होते हैं।

    बॉम्बे हाई कोर्ट से एआई इस्तेमाल पर जुर्माना

    जस्टिस बागजी ने इस मौके पर वकीलों की पुरानी पीढ़ी को याद कर कहा कि एक जमाने में सीनियर एडवोकेट अशोक कुमार सेन जैसे वकील थे, जो ड्राफ्टिंग के मास्टर माने जाते थे। उनकी दलीलें सटीक, छोटी और मूल होती थीं। हाल में ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एआई से तैयार एक फर्जी कोटेशन के इस्तेमाल के लिए याचिकाकर्ता पर जुर्माना ठोका था।

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