जानकारी के अनुसार एम्स में 4,099 फैकल्टी पदों में से 1,600 पद यानी लगभग 39% खाली पड़े हैं। इससे मरीजों की देखभाल, स्पेशलिस्ट सेवाओं और मेडिकल शिक्षा पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अलग-अलग राज्यों के 11 एम्स से मिले RTI जवाबों पर आधारित डेटा, पुराने, स्थापित AIIMS और नए संस्थानों दोनों में व्यापक कमी की ओर इशारा करते हैं।
किस एम्स में कितने पद खाली?
AIIMS दिल्ली देश का सबसे पुराना और सबसे बड़ा एम्स है। यहां मेडिसिन, सर्जरी, एनेस्थीसिया, पीडियाट्रिक्स, न्यूरोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और इमरजेंसी केयर जैसे मुख्य विभागों में 1,306 स्वीकृत पदों में से 524 फैकल्टी पद खाली हैं। कई नए AIIMS में तो और भी अधिक कमी है।
AIIMS जोधपुर सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 405 फैकल्टी पदों में से 189 यानी 46.7% पद खाली हैं। AIIMS गोरखपुर में 45.5% पद खाली हैं। वहीं, AIIMS जम्मू में 44.3% की कमी है। AIIMS कल्याणी और AIIMS बिलासपुर में भी 40% से ज़्यादा पद खाली हैं। AIIMS नागपुर में 373 स्वीकृत पदों में से 137 पद खाली हैं, जो 36.7% खाली पदों के बराबर है।
दूसरे संस्थानों में कमी थोड़ी कम है – लेकिन फिर भी यह काफी ज़्यादा है। AIIMS बठिंडा में फैकल्टी की संख्या में 37.4% की कमी है, AIIMS रायपुर में 34.8%, AIIMS भुवनेश्वर में 26% और AIIMS भोपाल में 25.6% की कमी है।
क्या कह रहे हेल्थ एक्सपर्ट्स?
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि टीचिंग अस्पतालों में फैकल्टी की लंबे समय तक कमी से आउटपेशेंट सेवाओं, सर्जरी शेड्यूल, ICU सुपरविज़न और अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट डॉक्टरों की ट्रेनिंग पर असर पड़ता है। इसकी वजह है कि सीनियर फैकल्टी को क्लिनिकल, एकेडमिक और एडमिनिस्ट्रेटिव तीनों तरह की भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं।
स्टाफ की कमी की चिंताओं पर जवाब देते हुए, AIIMS दिल्ली की मीडिया सेल इंचार्ज रीमा दादा ने कहा कि भर्ती की कोशिशें जारी हैं। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू चल रहे हैं, और खाली पदों को भरने की प्रक्रिया नियमित रूप से की जा रही है। AIIMS अस्पताल हर साल लाखों मरीजों का इलाज करते हैं। इनमें से कई को ज़िला और राज्य के अस्पतालों से जटिल इलाज के लिए रेफर किया जाता है।
Azad Hind की तरफ से प्राप्त RTI डेटा से पता चलता है कि तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी भर्ती की गति के बीच एक बड़ा अंतर है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या भारत के प्रमुख मेडिकल संस्थानों में बढ़ती हेल्थकेयर मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टाफ है।













