सबसे ज्यादा प्लेन क्रैश लैंडिंग और टेकऑफ के दौरान
एविएशन सेफ्टी के अनुसार, सबसे ज्यादा विमान हादसे टेक ऑफ के दौरान और फिर लैंडिंग के दौरान होते हैं। 2023 में 109 ऐसी दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें से 37 टेकऑफ और 30 लैंडिंग के दौरान हुई थीं। बीते साल एयर इंडिया विमान हादसा भी टेकऑफ के दौरान ही हुआ था। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीते 7 साल में हर साल औसतन 200 विमान हादसे हुए हैं। दरअसल, टेकऑफ या लैंडिंग के दौरान ही अक्सर इंजन फेल हो जाते हैं। यह तकनीकी खामी के चलते होती है।
पायलट कई बार कर बैठते हैं बड़ी गलती
wkw.com पर छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर प्लेन हादसों में पायलट की गलती विमानन दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है। विमान चलाने के लिए लंबी ट्रेनिंग, विमान के मैकेनिकल का ज्ञान और विमान को प्रभावी ढंग से और सुरक्षित रूप से चलाने के लिए हाथों-आंखों में बेहतर तालमेल की आवश्यकता होती है। पायलटों को आगे के बारे में भी सोचना पड़ता है। उड़ानों की योजना बनाना, मौसम की जांच करना और बदलावों का अनुमान लगाना, ये सभी सुरक्षित पायलट होने की कुंजी हैं।
6 साल में 813 प्लेन हो गए हादसों का शिकार
विमान हादसों पर नजर रखने वाली संस्था एविएशन सेफ्टी के आंकड़ों के अनुसार, 2017 से 2023 के बीच दुनियाभर में 813 प्लेन क्रैश हो चुके हैं। प्लेन क्रैश की 813 घटनाओं में 1,473 यात्रियों ने इन हादसों में जान गंवा दी थी। सबसे ज्यादा विमान हादसे लैंडिंग के दौरान होते हैं। इन सात साल में लैंडिंग के दौरान 261 हादसे हुए हैं। उसके बाद 212 हादसे उड़ान के दौरान ही हुए हैं। इसी दौरान भारत में 14 हादसे हुए हैं।
खराब मौसम भी प्लेन क्रैश के लिए अहम वजह
रिपोर्ट के अनुसार, पायलट कई बार खराब मौसम में फंस जाता है या सटीक अनुमान नहीं लगा पाता है तो प्लेन क्रैश हो सकता है। बादलों में प्लेन उड़ाते वक्त भी कभी-कभी पायलट भ्रमित हो जाते हैं। यदि पायलट अच्छे कॉकपिट संसाधन प्रबंधन कौशल का पालन नहीं करते हैं तो प्लेन क्रैश हो सकते हैं। मौसम की स्थिति के आधार पर, विमान विज़ुअल फ्लाइट रूल्स (VFR) या इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट रूल्स (IFR) द्वारा संचालित होंगे। VFR उड़ाने वाले पायलट मुख्य रूप से विमान को सुरक्षित रूप से उड़ाने के लिए कॉकपिट के बाहर दृष्टि और दृश्य संकेतों का उपयोग करते हैं। इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट रूल्स (IFR) के तहत विमान संचालन में विशेष ज्ञान और कौशल की जरूरत होती है।
ATC की लापरवाही भी बड़ी भूमिका निभा सकती है
नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) की प्लेन की लैंडिंग और टेकऑफ में बड़ी भूमिका होती है। ATC विमानों को एक दूसरे से अलग रखने और भीड़भाड़ वाले हवाई क्षेत्र में उड़ानों का मार्गदर्शन करने में मदद करते हैं। ATC पायलटों से संवाद करते हैं और उन्हें उड़ान की दिशा बताते हैं और विमान को जिस ऊंचाई पर उड़ना चाहिए, उसके बारे में बताते हैं। यदि ATC पायलट को गलत जानकारी देता है या उड़ानों को अलग-अलग बनाए रखने में विफल रहता है, तो टकराव हो सकता है।
पक्षियों के टकराने से भी होते हैं ऐसे बड़े हादसे
वेबसाइट Travel Radar के अनुसार, दुनियाभर में हर दिन बर्ड स्ट्राइक के औसतन 150 मामले सामने आते हैं। अकेले अमेरिका में ही हर साल 14 हजार बर्ड स्ट्राइक के मामले सामने आते हैं। 2016 से 2021 तक के पांच साल के आंकड़ों की बात करें तो 2,73,000 मामले सामने आ चुके हैं। यह भी कहा जाता है कि दुनिया में 80 फीसदी बर्ड स्ट्राइक तो रिपोर्ट ही नहीं हो पाती हैं।














