अमेरिका-इजरायल मिलकर बना रहे एरो 4
इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज एरो 4 इंटरसेप्टर प्रोजेक्ट को अमेरिकी मिसाइल डिफेंस एजेंसी की भागीदारी से के साथ मिलकर डेवलप कर रहा है। इस प्रोजेक्ट का मकसद उन मैन्यूवरेबल और हाइपरसोनिक खतरों का मुकाबला करना है जो इस क्षेत्र के देशों के हथियारों के जखीरे में तेजी से बढ़ रहे हैं। एरो 4 को एरो 2 और एरो 3 की जगह लेने के लिए डिजाइन किया गया है। नए इंटरसेप्टर में ज्यादा मैन्यूवरेबिलिटी और एंगेजमेंट के टर्मिनल फेज में बेहतर एक्यूरेसी है।
अडवांस तकनीक से लैस है एरो 4 इंटरसेप्टर
एरो 4 इंटरसेप्टर सिस्टम एडवांस्ड सैटेलाइट-एडेड इनर्शियल गाइडेंस से लैस है। IAI के प्रेसिडेंट और CEO बोअज लेवी ने पहले बताया था कि एरो 4 का सीरियल प्रोडक्शन 2025 के आखिर में शुरू होने वाला है, जिससे 2026 की शुरुआत में शुरुआती डिप्लॉयमेंट का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि, इसमें अब देरी की संभावना जताई जा रही है। इजरायल के अलावा जर्मनी एरो 4 इंटरसेप्टर को खरीदने का प्लान बना रहा है।
इजरायल भारत को ऑफर करेगा एरो 4?
भारत और इजरायल में रक्षा संबंध काफी मजबूत हैं। भारत ने हाल में ही इजरायल से 8.6 मिलियन डॉलर के हथियारों की खरीद का फैसला किया है। इजरायल भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश भी है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि इजरायल भविष्य में भारत को एरो 4 इंटरसेप्टर खरीदने का ऑफर दे सकता है। भारत को चीन और पाकिस्तान से खतरे को देखते हुए हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकने के लिए ऐसे इंटरसेप्टर की बहुत जरूरत है।













