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  • Astro Remedies: जब मन अशांत हो तो क्या करें, ज्योतिष शास्त्र के ये उपाय दूर करेंगे आपकी समस्या

    अक्सर जब किसी व्यक्ति के जीवन में हलचल होती है, जब जीवन में वाद-विवाद, कलह-क्लेश, अपेक्षाओं का पूरा न होना, परिस्थितयां अनुकूल न होना जैसी स्थितियां आती हैं, तब उस व्यक्ति का मन किसी भी कार्य में नहीं लगता और नकारात्मक सोच-विचार घर करने लगते हैं, ऐसे में ज्योतिषीय उपायों का सहारा लेना सही रहता


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    By Azad Hind Desk फरवरी 2, 2026
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    अक्सर जब किसी व्यक्ति के जीवन में हलचल होती है, जब जीवन में वाद-विवाद, कलह-क्लेश, अपेक्षाओं का पूरा न होना, परिस्थितयां अनुकूल न होना जैसी स्थितियां आती हैं, तब उस व्यक्ति का मन किसी भी कार्य में नहीं लगता और नकारात्मक सोच-विचार घर करने लगते हैं, ऐसे में ज्योतिषीय उपायों का सहारा लेना सही रहता है। जहां मनोविज्ञान व्यक्ति के व्यक्तित्व, उसकी मानसिक क्षमता, उस व्यक्ति के बारे में असंख्य जानकारी उपलब्ध कराता है, वहीं ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति के द्वारा भी व्यक्ति के मन की परतों को खोलकर भीतर छिपे रहस्यों को उजागर किया जा सकता है।

    उदाहरण के तौर पर किसी भी व्यक्ति की जन्मकुण्डली में यदि चन्द्रमा निर्बल हो, पीड़ित हो, नीच अवस्था में हो, तो उस व्यक्ति को निर्णय लेने में कठिनाई होती है और जीवन में जरा-सी विपरीत परिस्थिति सामने आने पर उसका मन तुरन्त विचलित हो जाता है। विचलित मन के प्रभाव से व्यक्ति के कार्य करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है और नकारात्मक सोच-विचार घर करने लगते हैं। जब मन में नकारात्मक सोच-विचार ज्यादा आए, तो व्यक्ति को स्वयं को किसी ऐसे कार्य में लगाने का प्रयास करना चाहिए, जिसमें उस व्यक्ति की रुचि हो। ज्योतिष शास्त्र में उपायों के माध्यम से मन को सबल बनाने के विभिन्न माध्यम बताए जाते हैं, जो व्यक्ति को नकारात्मक परिस्थिति से लड़ने और अपने अनुकूल बनाने में मददगार साबित होते हैं।

    मन को सबल बनाने के उपाय

    • जन्मकुण्डली में चन्द्रमा निर्बल होने पर शिव जी की शरण में जाना चाहिए।
    • प्रत्येक सोमवार शिवजी को जल एवं अक्षत चढ़ाने से व्यक्ति का मन शांत हो जाता है।
    • पूर्णिमा के दिन चांदी के अर्द्धचन्द्रमा में मोती जड़वाकर धारण करने से सुरक्षा कवच का कार्य होताहै, जिससे व्यक्ति का मन विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहता है।
    • प्रत्येक पूर्णिमा को व्रत रखकर सफेद वस्तुओं का दान करना भी श्रेयस्कर उपाय है, जिससे जन्मकुण्डली में मौजूद पीड़ित चन्द्रमा को बल प्राप्त होता है।
    • जन्मकुण्डली में चन्द्रमा यादि राहु के साथ स्थित हो, तो वह ग्रहण योग का सृजन करता है, अतः प्रत्येक सोमवार दो बड़े बताशे का दान अवश्य करना चाहिए।
    • ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा माता का कारक है, अतः कोई भी विपरीत परिस्थिति हो, तो अपनी माता से सलाह लेकर ही कार्य-व्यवहार करें और उनकी सेवा करने से न चूकें।

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