इस फैसले से यह भी पक्का हो गया है कि सरकार इस योजना के प्रचार-प्रसार, विकास और इसे आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए पैसा देती रहेगी। इसका मतलब है कि जिन मजदूरों के पास नौकरी के बाद पेंशन का कोई इंतजाम नहीं है, उन्हें 60 साल की उम्र के बाद हर महीने 1,000 से 5,000 रुपये तक की गारंटी वाली पेंशन मिलेगी। यह पेंशन उनके द्वारा किए गए योगदान पर निर्भर करेगी।
रिटायरमेंट के बाद NPS से पक्की पेंशन का इंतजाम! सरकार ने कर दिया यह काम
क्या है यह स्कीम?
यह योजना बुढ़ापे में इनकम की सुरक्षा देती है और खासकर गांवों और छोटे शहरों के मजदूरों को आर्थिक रूप से जोड़ने में मदद करती है। कैबिनेट मीटिंग में फैसला लिया गया कि सरकार जागरूकता फैलाने, लोगों को इस योजना के बारे में बताने और इसे और बेहतर बनाने के लिए लगातार मदद करती रहेगी। साथ ही, योजना को लंबे समय तक चलाने के लिए जरूरी आर्थिक मदद भी जारी रहेगी।
साल 2015 में हुई थी शुरू
अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को हुई थी। इसका मकसद ऐसे मजदूरों को पेंशन का फायदा पहुंचाना है जो किसी फॉर्मल पेंशन सिस्टम से नहीं जुड़े हैं। यह योजना उन्हें थोड़ी-थोड़ी बचत करने के लिए प्रेरित करती है ताकि वे रिटायरमेंट के बाद आराम से रह सकें। यह भारत के सामाजिक सुरक्षा ढांचे का एक अहम हिस्सा बन गई है।
19 जनवरी 2026 तक 8.66 करोड़ से ज्यादा लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं। सरकार का कहना है कि लोगों को इस योजना के बारे में बताते रहना, इसे अच्छे से लागू करना और इसे लंबे समय तक ठीक-ठाक चलाना बहुत जरूरी है। इसलिए सरकार का सहयोग आगे भी जारी रहेगा।













