तारिक रहमान ने अपना घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा, ‘बांग्लादेश में अगर बीएनपी फिर से सत्ता में आती है तो सबसे पहला काम मिडिल क्लास के लिए रोजगार पैदा करना और कर्ज पर निर्भर अर्थव्यवस्था को निवेश वाली इकॉनमी में बदलना होगा। हमारी सरकार साल 2034 तक 1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाकर बांग्लादेश को एक अपर-मिडिल-इनकम देश बनाएगी।’
बांग्लादेश के मिडिल क्लास को मजबूत करेंगे: तारिक रहमान
वोटिंग से पांच दिन पहले चुनावी घोषणापत्र में बीएनपी ने बांग्लादेश को एक आधुनिक, लोकतांत्रिक, अपर मिडिल इनकम देश में बदलने की बात कही है। इसमें कहा गया है कि बांग्लादेश की आर्थिक बदलाव की यात्रा किसी समूह के विशेष अधिकारों पर आधारित नहीं होगी बल्कि देश के हर नागरिक की उत्पादक शक्ति पर आधारित होगी।
तारिक रहमान ने अपने भाषण में कहा, ‘हम कुलीनतंत्र की संरचना को तोड़ना चाहते हैं। हम ऐसी व्यवस्था बनाएंगे, जहां सभी को उनके अधिकार मिलेंगे। हमारा देश तभी वास्तविक आर्थिक विकास हासिल करता है, जब उसका मध्यम वर्ग बढ़ेगा। आज बांग्लादेश का मध्यम वर्ग तकरीबन खत्म हो गया है। हम उन्हें फिर से वापस मुख्यधारा में लाएंगे।’
BNP की विदेश नीति और भारत पर रुख
बीएनपी ने अपने घोषणापत्र में कहा है, ‘हम अपनी विदेश नीति में बांग्लादेश फर्स्ट की रणनीति अपनाएगी। बीएनपी बांग्लादेश की सीमाओं के पार के दोशों को दोस्त मानती है ना कि मालिक। विदेश नीति में बांग्लादेश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे बांग्लादेश को दुनिया में आत्म-सम्मान वाला, सक्रिय और जिम्मेदार स्थान मिलेगा।’
भारत की ओर इशारा करते हुए तारिक रहमान ने कहा है कि पद्मा, तीस्ता और नदियों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। हम इन नदियों के पानी का ‘उचित हिस्सा’ हासिल करने पर काम करेंगे। रहमान ने कहा, ‘हम लगातार बातचीत के जरिए पानी बंटवारे की समस्या को हल करना चाहते हैं। मैं यह चाहता हूं मेरे देश के लोगों को इन नदियों के पानी से उचित हिस्सा मिले।’
बीएनपी का इतिहास
बीएनपी को तारिक रहमान के पिता जियाउर्रहमान ने 1978 में बनाया था। इसके एक साल बाद ही 1979 में बांग्लादेश में पार्टी ने अपनी पहली बड़ी जीत हासिल की। जिया की हत्या के बाद तारिक की मां खालिदा जिया ने 1984 में पार्टी का नेतृत्व संभाला और बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। खालिदा की मौत के बाद तारिक के पास पार्टी की कमान है।
शेख हसीना की सरकार (2009 से 2024) में बीएनपी को मुश्किल का सामना करना पड़ा। इस दौरान खालिदा जिया और तारिक पर कई मुकदमें दर्ज हुए। हसीना ने जेल में लंबा समय बिताया तो तारिक निर्वासन में लंदन में रहे। चुनावों में पारदर्शिता ना होने की बात कहते हुए बीएनपी ने 2014 और 2024 के चुनावों का बहिष्कार किया था।














