दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री हसन महमूद ने कहा कि जुलाई हिंसा के बाद कहा गया कि 400 लोग मारे गए। इसके बाद ये संख्या बढ़ी हुई बताई जाने लगी। यूनुस प्रशासन की ओर से इन आंकड़ों को बदलने की कोशिश की गई। यूएन की रिपोर्ट कहती है कि 1400 लोग मारे गए लेकिन सरकारी गैजेट में मरने वालों की संख्या 800 है। ये दिखाता है कि सबकुछ निष्पक्ष तरीके से नहीं किया गया।
यूनुस सरकार हिंदुओ की सुरक्षा में फेल
हसन ने कहा कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में बीते डेढ़ साल में बांग्लादेश में सांप्रदायिकता बढ़ी है। देश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को सरकार नहीं रोक पा रही है। युनूस सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब वह छात्र नेता हादी की हत्या बात करते हैं तो हिंदू युवा दीपू चंद दास की हत्या पर चुप्पी क्यों साध लेते हैं।
बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले चुनावों की वैधता पर भी अवामी लीग के नेताओं ने सवाल उठाया है। हसन ने कहा कि अगर चुनाव होते हैं तो इनमें साठ फीसदी वोटरों की भागीदारी पर सवाल है क्योंकि ये सभी अवामी लीग के समर्थक हैं। अगर अवामी लीग इस चुनाव में शामिल ही नहीं है तो फिर ये मैनेज किए गए इलेक्शन साबित होंगे।
यूनुस प्रशासन का रवैया भेदभाव भरा
हसन ने कहा कि अगर अवामी लीग को चुनाव लड़ने की इजाजत मिलती है तो ये निष्पक्ष प्रशासन के तहत होना चाहिए। मौजूदा यूनुस प्रशासन का रवैया हमारे प्रति भेदभाव से भरा है। हम पहले भी जेल गए हैं। हम वापस आने के लिए तैयार हैं लेकिन कानून का शासन होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक कोई नई लोकतांत्रिक सरकार ना बन जाए तब तक कानूनन शेख हसीना की सरकार ढाका में है।












