जोश और अनुभव दोनों
माना जा रहा है कि पार्टी की जो नई राष्ट्रीय टीम बनेगी उसमें युवा ज्यादा हो सकते हैं पर सीनियर्स को भी अनदेखा नहीं किया जाएगा। एक नेता ने कहा कि पार्टी को युवा जोश चाहिए तो सीनियर्स के अनुभव की भी जरूरत है। ऐसे में नितिन नबीन के सामने चुनौती युवा और सीनियर्स की टीम को साथ लेकर चलने की होगी।
BJP का संसदीय बोर्ड सबसे अहम होता है। किसे टिकट देना है, किसे सीएम उम्मीदवार बनाना है, पार्टी संविधान के मुताबिक ये सभी फैसले संसदीय बोर्ड में ही लिए जाते हैं। BJP के संसदीय बोर्ड में इस वक्त जेपी नड्डा (उम्र 65 साल) के अलावा पीएम नरेंद्र मोदी (75), अमित शाह (61), राजनाथ सिंह (74), सर्बानंद सोनोवाल (63), बीएस येदियुरप्पा (82), के. लक्ष्मण (69), इकबाल सिंह लालपुरा (71), सुधा यादव (60), सत्यनारायण जटिया (79) और बीएल संतोष (55) हैं। यानी लगभग सभी 60 साल से ज्यादा उम्र के हैं। नितिन नबीन खुद 45 साल के हैं तो इस बार संसदीय बोर्ड में कौन-कौन शामिल होते हैं, यह भी देखना होगा।
पार्टी का संविधान कहता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष वही बन सकता है जो कम से कम चार अवधियों तक सक्रिय सदस्य और कम से कम 15 साल तक पार्टी का प्राथमिक सदस्य रहा हो। BJP के सांगठनिक चुनाव में सबसे पहले प्राथमिक समिति के चुनाव होते हैं। फिर मंडल स्तर पर और फिर जिला स्तर पर चुनाव होते हैं। इसके साथ ही प्रदेश स्तर का निर्वाचन मंडल चुना जाता है। प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए उस प्रदेश में विधानसभा की जितनी सीटें हैं, उतने सदस्य होते हैं। अगर कोई महिला चुन कर नहीं आती तो महिला का समायोजन करना होता है। उस प्रदेश में विधानसभा की जितनी सीटें आरक्षित हैं उतने ही उस आरक्षित समुदाय के लोग इस निर्वाचन मंडल में होते हैं। ये सब मिलकर प्रदेश अध्यक्ष को चुनते हैं।
मतदान के आसार कम
इसी समय राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन मंडल का भी चुनाव होता है जिसे राष्ट्रीय परिषद कहते हैं। यही परिषद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करती है। जितनी लोकसभा सीटें है उतने सदस्य राष्ट्रीय परिषद में होते हैं और अगर कोई महिला चुनकर नहीं आई तो उनका समायोजन करना होता है। लोकसभा में जितनी आरक्षित सीटें हैं उतने ही सदस्य आरक्षित समुदाय के होते हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए उम्मीदवारों का नामांकन ऐसे कम से कम पांच राज्यों की राष्ट्रीय परिषद इकाइयों से प्रस्तावित होना चाहिए, जहां संगठन के चुनाव पूरे हो चुके हों। साथ ही उम्मीदवार को नामांकन पत्र में अपनी सहमति देनी होती है। हालांकि BJP के अब तक के इतिहास में कभी भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए मतदान की स्थिति नहीं आई है। हर बार राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव निर्विरोध ही हुआ है। लेकिन चुनाव की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।














