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  • BJP के लिए ‘अच्छे दिन’ आरएसएस की वजह से न कि; क्या बोले मोहन भागवत

    नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देश के अलग-अलग राज्यों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में रविवार को बॉलीवुड से जुड़े कई स्टार्स को देखा गया। इस अवसर पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दर्शकों से बातचीत के दौरान कहा कि


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    By Azad Hind Desk फरवरी 9, 2026
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    नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देश के अलग-अलग राज्यों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में रविवार को बॉलीवुड से जुड़े कई स्टार्स को देखा गया।

    इस अवसर पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दर्शकों से बातचीत के दौरान कहा कि BJP के ‘अच्छे दिन’ RSS की वजह से हैं, न कि इसका उल्टा। उन्होंने कहा, ‘RSS राम मंदिर आंदोलन के लिए प्रतिबद्ध था और जिन्होंने इसका समर्थन किया, उन्हें फायदा हुआ,’ उन्होंने आगे कहा कि RSS के लिए ‘अच्छे दिन’ स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत और विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता से आए।

    मोहन भागवत ने कहा कि सरसंघचालक का पद किसी जाति विशेष के लिए आरक्षित नहीं है। अनुसूचित जाति या जनजाति से होना कोई बाधा नहीं है और ब्राह्मण होना कोई अतिरिक्त योग्यता नहीं मानी जाती। उन्होंने स्वीकार किया कि संघ की शुरुआत में ब्राह्मणों की संख्या अधिक थी, लेकिन आज संघ सभी जातियों के लिए समान रूप से काम करता है।

    पीएम मोदी पर क्या बोले भागवत?

    उन्होंने कहा कि कई लोग कहते हैं कि नरेंद्र मोदी आरएसएस से आए प्रधानमंत्री हैं, लेकिन यह सही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं। उनकी राजनीतिक पार्टी भाजपा है, जो आरएसएस से अलग है। हां, भाजपा में आरएसएस के स्वयंसेवक हो सकते हैं, जैसे अन्य क्षेत्रों में भी हैं।

    भागवत ने और क्या-क्या कहा?

    • देश और समाज पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि भारत एक प्राचीन सभ्यता है और अगर भारत महान बनेगा तो दुनिया भी महान बनेगी। उन्होंने कहा कि इस भूमि पर जन्मे लोगों का आचरण ऐसा होना चाहिए कि दुनिया के लोग यहां आकर हमारे व्यवहार से जीवन मूल्य सीखें। एक सक्षम और समृद्ध राष्ट्र के लिए एकजुट और चरित्रवान समाज जरूरी है, जहां कोई भी पीछे न छूटे।
    • भाषा के मुद्दे पर आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हम भारत हैं और हमारी अपनी पहचान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंग्रेजी संघ की कार्यप्रणाली का हिस्सा नहीं बनेगी, क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। हालांकि, जहां अंग्रेजी की जरूरत होती है, वहां उसका उपयोग किया जाता है। संघ किसी भी भाषा का विरोध नहीं करता, लेकिन अपनी मातृभाषा और हिंदी को प्राथमिकता देना जरूरी है।
    • संघ को लेकर फैलने वाली भ्रांतियों पर मोहन भागवत ने कहा कि नए काम में भ्रम होना स्वाभाविक है और कई बार यह जानबूझकर भी फैलाया जाता है। संघ के साथ भी ऐसा हुआ है, लेकिन सच्चाई सामने आने पर भ्रम अपने आप खत्म हो जाता है। अब संघ ज्यादा से ज्यादा जानकारी साझा कर रहा है और आउटरीच कार्यक्रमों के जरिए लोगों को संघ के काम के बारे में बताया जा रहा है।
    • आरएसएस की फंडिंग को लेकर उन्होंने कहा कि संघ स्वयंसेवकों के सहयोग से चलता है। यात्राओं के दौरान कार्यकर्ता होटल में रुकने या बाहर खाने के बजाय स्वयंसेवकों के घर ठहरते हैं और वही भोजन करते हैं।
    • धर्मांतरण और ‘घर वापसी’ पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि सभी धार्मिक विचारों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन जबरन धर्मांतरण गलत है। ऐसे मामलों में लोगों को उनकी इच्छा से वापस लाया जाना चाहिए। अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर उन्होंने सरकार से अपील की कि उनकी पहचान कर उन्हें निर्वासित किया जाए और देश में कारोबार भारतीयों को ही दिया जाए, चाहे वे किसी भी धर्म के हों।
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