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  • BJP की नई RSS टीम कैसी होगी, मोहन भागवत और नितिन नवीन की बैठक में लगेगी फाइनल मुहर

    नई दिल्ली: बीजेपी, आरएसएस प्रचारकों की भारी कमी से जूझ रही है। कई राज्यों में आरएसएस के लिए रिजर्व संगठन महामंत्री (महासचिव-संगठन) के पद खाली हैं। 13 मार्च से हरियाणा में पानीपत के पास समलखा में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की निर्णय लेने वाली सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक


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    By Azad Hind Desk मार्च 2, 2026
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    नई दिल्ली: बीजेपी, आरएसएस प्रचारकों की भारी कमी से जूझ रही है। कई राज्यों में आरएसएस के लिए रिजर्व संगठन महामंत्री (महासचिव-संगठन) के पद खाली हैं। 13 मार्च से हरियाणा में पानीपत के पास समलखा में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की निर्णय लेने वाली सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक होने वाली है। इसकी अध्यक्ष आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत करेंगे और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर नितिन नवीन भी पहली बार इसका हिस्सा बनेंगे।

    अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक

    आरएसएस के सामने जितने भी बड़े मुद्दे होते हैं, उनका निर्णय संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ही लेती है। इस बार यह बैठक हरियाणा में पानीपत के पास समलखा में होने वाली है। हमारे सहयोगी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार माना जा रहा है कि इस बैठक में बीजेपी की ओर से नितिन नवीन उन पदों को भरे जाने की उम्मीद में पहुंचेंगे, जो बीजेपी में संघ के पदाधिकारियों के लिए सुरक्षित रहता है।

    कई राज्यों में महासचिव (संगठन) के पद खाली

    इस समय केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा और मणिपुर में बीजेपी के महासचिव (संगठन) के पद खाली पड़े हैं, जिनपर संघ के प्रचारकों की नियुक्ति होती है। महासचिव (संगठन) आरएसएस और बीजेपी के बीच पुल का काम करते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर यह जिम्मेदारी अभी बीएल संतोष निभा रहे हैं और अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के भी शामिल होने की परंपरा रही है।

    आरएसएस के पास पूर्णकालिक प्रचारकों की कमी

    आरएसएस पिछले कुछ वर्षों से बीजेपी के लिए पूर्णकालिक प्रचारकों को नहीं नियुक्त कर पा रहा है। 2025 में आरएसएस के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने कहा था कि उनके पास प्रचारकों की भारी कमी है, क्योंकि इसके कई संगठनों को पूर्ण कालिक प्रचारक चाहिए और संघ के अपने कार्यों का भी दायरा बढ़ रहा है।

    प्रचारकों के दायित्व बदलता रहता है आरएसएस

    बीजेपी के एक सूत्र ने आज़ाद हिन्द ऑनलाइन से कहा है कि ‘प्रत्येक साल मार्च में संघ अपने विभिन्न संगठनों में काम कर रहे प्रचारकों की एक तरह से ट्रांसफर-पोस्टिंग करता है। कई प्रचारक लंबे समय से एक ही राज्य में होते हैं, तो उन्हें नई जिम्मेदारियां दी जाती हैं। जैसे दिल्ली के महासचिव (संगठन) पवन राणा 12 साल से हिमाचल में थे और फिर कुछ वर्ष पहले उन्हें दिल्ली लाया गया। वहीं सिद्धार्थन को हिमाचल भेज दिया गया।’

    बीएल संतोष की भी संघ में हो सकती है वापसी

    यही नहीं, बीजेपी सूत्र का कहना है कि ‘राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष की भी संघ में वापसी हो सकती है। उनकी जगह सह-संगठन महामंत्री शिव प्रकाश को उनका प्रभार मिल सकता है। या बिहार-झारखंड के क्षेत्रीय प्रचारक नागेंद्र सिंह को भी लिया जा सकता है। यही नहीं, आरएसएस डायरेक्ट भी किसी प्रचारक को राष्ट्रीय संगठन महामंत्री का दायित्व सौंप सकता है।’

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